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UP Assembly Election 2022 : चुनावी डयूटी कटवाने को मैडम से लेकर बाबू तक परेशान,कारण जान हो जाएंगे हैरान

UP Assembly Election 2022 अभी कुछ माह पूर्व ही पंचायत चुनाव की डयूटी कर निजात मिली तो अब विधानसभा चुनाव सिर पर आ गए। ठंड और ऊपर से चुनावी डयूटी का सितम। सरकारी कर्मचारी अपनी चुनावी डयूटी कटवाने के लिए कंट्रोल रूम के चक्कर काट रहे हैं। चुनावी डयूटी कटवाने के लिए ऐसे बहाने बना रहे हैं जिन्हें पढ़कर हर कोई हैरान हो जाएगा।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Jan 16, 2022

UP Assembly Election 2022 : चुनावी डयूटी कटवाने को मैडम से लेकर बाबू तक कर रहे ऐसे जतन,पढ़कर हो जाएंगे हैरान

UP Assembly Election 2022 : चुनावी डयूटी कटवाने को मैडम से लेकर बाबू तक कर रहे ऐसे जतन,पढ़कर हो जाएंगे हैरान

UP Assembly Election 2022 चुनाव कोई भी हो। ये देश की लोकतांत्रित प्रकिया है। देश में वैसे तो कई प्रकार के चुनाव होते हैं। लेकिन बड़े स्तर पर जो चुनाव निर्वाचन आयोग द्वारा करवाए जाते हैं। वे हैं आम चुनाव,विधानसभा चुनाव और पंचायत स्तर के चुनाव। इस समय अपने उप्र समेत 5 प्रदेशों में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। जिसके बाद चुनावी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस चुनावी प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए सरकारी कर्मचारियों की डयूटी लगाई जाती है। चुनावी डयूटी को कुछ कर्मचारी तो उत्साह के साथ निभाते हैं लेकिन कुछ यहां भी डयूटी करने में कंजूसी बरतते हैं। लेकिन डयूटी कटवाने में कुछ की मजबूरी और परेशानी होती है लेकिन इनमें अधिकांश ऐसे होते हैं जो चुनावी डयूटी से जान बचाते हैं।

इस बार मेरठ में आगामी 10 फरवरी को मतदान होने हैं। ऐसे में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए कर्मचारियों की संख्या भी पर्याप्त होनी चाहिए। लेकिन चुनावी डयूटी से पहले ही यह संख्या जुटाने में जिला प्रशासन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी कर्मचारी अपनी चुनावी डयूटी कटवाने के लिए तरह—तरह के बहाने और मेडिकल सर्टिफिकेट तक जमा कर रहे हैं। चुनाव डयूटी न करने के इनके तर्क भी बहुत अजीब है।

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जो कर्मचारी चुनावी डयूटी नहीं करना चाहते उनमें कुछ महिलाएं अपनी सास के बीमार होने तो कोई पुरूष सरकारी कर्मचारी घर में बच्चों की देखभाल और अपनी कोविड बीमारी का सर्टिफिकेट लगा रहा है। इतना ही नहीं कुछ लोग पुरानी जान-पहचान का हवाला देकर भी अपनी चुनाव ड्यूटी कटवाने के लिए लगे हुए हैं।

बता दे कि विधानसभा चुनाव में जिन कर्मचारियों की डयूटी लगाई जा रही है उनको अतिरिक्त सतर्कता के साथ टीकाकरण की बूस्टर डोज भी दी जा रही है। इसके बाद भी विभिन्न विभागों के कर्मचारी बीमारी से लेकर पुरानी पहचान का हवाला देकर ड्यूटी कटवाने के लिए विकास भवन के चक्कर काट रहे हैं। यहां पर सबसे बुरा हाल शिक्षा विभाग का है। उसमें भी बेसिक शिक्षा विभाग का। जहां पर कई शिक्षिकाओं ने अपनी सास व मां के बीमारी का हवाला देते हुए चुनावी ड्यूटी से मुक्त करने का आग्रह किया है। वहीं एक सरकारी शिक्षक ने तो घर में बच्चों को संभालने के लिए ड्यूटी कटवाने को आवेदन किया है।

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इसके अलावा एक महिला ने ससुर की देखभाल के लिए चुनावी ड्यूटी कटवाने को प्रार्थना पत्र दिया है। सीडीओ शशांक चौधरी ने बताया कि बीमार कर्मियों के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। पड़ताल के बाद ही किसी को ड्यूटी से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई है उनको बुस्टर डोज लगवाई जा रही है।

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