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लॉकडाउन में ईदगाह है लॉक तो ईद पर घर में पढ़ें चाश्त की नमाज, धर्मगुरुओं ने की ये अपील

Highlights सोमवार को मनाया जा रहा है ईद त्योहार घरों में ईद की नमाज पढऩे की अपील हुई शहरकाजी ने ईद पर लोगों से की अपील  

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मेरठ। रमजान का पवित्र माह की अलविदा जुमा की नमाज अदा होने के साथ ही ईद की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हालांकि इस बार लॉकडाउन में ईद घरों में ही मनाई जाएगी। लोग ईद की खुशियों को घर में मनाने की तैयारी जुट गए हैं। देश में इस बार ईद सोमवार को मनाई जाएगी। लॉकडाउन में ईदगाह में नमाज पढऩे पर मनाही है। किसी मस्जिद में भी ईद की नमाज नहीं पढ़ी जा सकेगी। ऐसे में सभी उलेमा से यह पूछ रहे हैं कि ईद की नमाज घरों में कैसे पढ़ी जाएगी। जबकि इस्लाम में नमाज-ए-ईद अनिवार्य है। मोहम्मद साहब ने भी इसे अदा किया था। ऐसे में नफ्ल नमाजों में से एक चाश्त की नमाज है, वो अदा की जाएगी। यह कहना है शहरकारी शफीकुर्रहमान का।

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कोरोना के चलते पूरे देश में लॉकडाउन है। जुमा की नमाज से लेकर पांचों वक्त की नमाज घरों में ही पढी जा रही है। लॉकडाउन के नियमों के मुताबिक नमाज-ए-ईद भी घर में पढ़ी जाएगी। इसको लेकर लोगों में जिज्ञासा है कि अगर पढऩी है तो इसका तरीका क्या होगा? अलीगढ मुस्लिम यूनिवॢसटी में प्रोफेसर रहे शहरकाजी जैनुस्साजिददीन कहते हैं कि ईद पर ईदगाह में नमाज की जगह नफ्ल नमाजों में से एक चाश्त की नमाज है वो अदा की जाएगी। सूरज निकलने से चढऩे तक इसकी फजीलत बयान की गई है।

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उन्होंने बताया कि कुछ हदीस में दो रकात और कुछ में चार रकात पढऩे का जिक्र है। शहरकाजी के अनुसार चाश्त की नमाज का महत्व मुस्लिम धार्मिक ग्रंथ सुनन इब्न माजा के भाग नंबर दो व पेज नंबर 153 (हदीस-1382) में जिक्र है कि मोहम्मद साहब ने कहा है, जो व्यक्ति चाश्त की दो रकातें पाबंदी से अदा करता रहे उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। नमाज का वक्त सूरज उदय होने के कम से कम 25 से 30 मिनट बाद से लेकर सूरज चढ़त तक नमाज का वक्त रहता है। ईद की नमाज ईदगाह में जाकर अदा की जाती है, वहीं चाश्त की नमाज अपने घर में अदा की जाएगी। उस नमाज में छह तकबीर ज्यादा होती हैं। इस नमाज में वो तकबीरें नहीं होंगी।

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नमाज-ए-ईद छूटने पर नमाजे चाश्त अदा कर लेनी चाहिए। मौजूदा सूरतेहाल में नमाजे ईद के बदले चाश्त की नमाज अदा की जा सकती है। जहां तक ईद की नमाज का सवाल है तो वो वाजिब है। इसमें छह पढ़ी हुई तक वीरे वाजिब है, जबकि खुतबा सुन्नत है। उसका सुनना वाजिब है। ईद की नमाज सही होने के लिए इमाम के साथ कम से कम तीन बालिग मर्दों का होना जरूरी है। ईद तक मस्जिदें नहीं खुलती हैं तो ईद की नमाज घर पर ही अदा करें।

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