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Republic Day 2018- गणतंत्र दिवस की परेड ने दी ऐसी सीख, जो जिंदगी भर नहीं भूलेगी

रोजाना रिहर्सल के लिए मध्यरात्रि 2.30 बजे राजपथ पर पहुंचना होता था आैर फिर यहां जबरदस्त लयबद्ध रिहर्सल होती थी।
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मेरठ

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Rahul Chauhan

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Updated: 26 Jan 2018, 9:54 AM IST

Republic day Parade-2016

मेरठ। गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लेने से वाकर्इ जिन्दगी भर के लिए देशभक्ति, अनुशासन आैर संस्कृति का संदेश मिलता है। दो साल पहले एनसीसी गर्ल्स बैंड पिलानी की सदस्य रहीं नवीं कक्षा की लावण्या गौतम गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल हुर्इं थी। इस परेड के लिए एक महीने की रिहर्सल हुई आैर इसमें लावण्य ने जाना कि भारत में देशभक्ति आैर एकता की जो मिसाल दी जाती है, वह क्यों दी जाती है? दरअसल, दिल्ली कैंट के आरडीसी परेड ग्राउंड में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल सभी राज्यों की टीमों को अलग-अलग पंडालों में 31 दिसंबर 2015 से लेकर 30 जनवरी 2016 तक ठहराया गया था।

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रोजाना रिहर्सल के लिए मध्यरात्रि 2.30 बजे राजपथ पर पहुंचना होता था आैर फिर यहां जबरदस्त लयबद्ध रिहर्सल होती थी। लावण्या ने कहा कि देशभक्ति के जज्बे के बीच न तो नींद आती थी आैर न ही थकान होती थी। उस रिहर्सल से लेकर गणतंत्र दिवस पर हुर्इ परेड तक देशभक्ति, अनुशासन आैर संस्कृति के बारे में सीखा, वह जिन्दगी भर याद रहेगा।

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पिछले दो सालों में
शास्त्रीनगर निवासी लावण्या ने बताया कि गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल हुए दो साल हो रहे हैं, लेकिन उस एक महीने का एक-एक पल उसे आज भी याद है। उत्तर-पूर्वी राज्यों से आयी एनसीसी कैडेट्स उनकी अच्छी दोस्त बन गर्इं थी। इस एक महीने में उन्हें अपने देश के बारे में जानने का बड़ा मौका मिला। अब गणतंत्र दिवस की परेड आते ही राजपथ तक पहुंचने को मन करता है। परेड में तिरंगे को दी सलामी आज भी उत्साह से भर देती है।

इनसे मिलने का मौका मिला
रिहर्सल आैर गणतंत्र परेड के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, तीनों सेनाध्यक्षों के सामने परेड की रिहर्सल के साथ-साथ इनसे मिलने का भी मौका मिला। लावण्या का कहना है कि देश के लोगों को गणतंत्र दिवस की परेड जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि इससे भारतीय संस्कृति आैर देशभक्ति की सीख मिलती है। परेड में रिहर्सल से लेकर गणतंत्र दिवस तक अनुशासन के साथ जीने का भी संदेश मिला।