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Shardiya Navratri 2021:: नवरात्र में देवी की भक्ति पर महंगाई का तड़का

Shardiya Navratri 2021: महंगाई दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इस पर अब सरकार का कोई नियंत्रण नहीं रहा। अब नवरात्र में भी महंगाई का तड़का लग गया है। यानी नवरात्र में देवी की भक्ति करना भी जेब पर काफी भारी पड़ रहा है।

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मेरठ

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Nitish Pandey

Oct 05, 2021

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Shardiya Navratri 2021: गुरुवार से शरदीय नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। नवरात्रों को लेकर मंदिरों और भक्तों ने अपने घरों में तैयारियां शुरू कर दी है। महानगर के बाजार भी भक्ति और पूजा का सामान चुनरी, श्रृंगार का सामान, नारियल सहित अन्य पूजन सामग्रियों से सज गए हैं। लेकिन इस बार पूजन सामग्री से लेकर फलाहार तक पर महंगाई का असर दिखाई दे रहा है।

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एक ओर जहां पिछले नवरात्र की तुलना में इस नवरात्र पर हर चीज के दामों में 10-20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं आलू के दाम भी आसमान पर पहुंच रहे हैं। नारियल, देवी की चुनरी पर महंगाई का रंग चढ़ गया है। फलाहार के रूप में प्रयोग किए जाने वाला कुट्टू, सिंघाड़े और सांवक का आटा भी महंगा हुआ है। पिछले नवरात्रे पर जो नारियल 40 रुपये का मिल रहा था, वहीं नारियल अब 50-60 रुपये में बेंचा जा रहा है।

फलाहार भी हुए महंगे

देवी को चढाई जाने वाली जो चुनरी 20 रुपये में मिलती थी। वही अब 30 रुपये में मिल रही हैं। इतना ही नहीं सबसे ज्यादा महंगाई की मार नवरात्रों पर व्रतियों के फलाहार सिंघाड़े, कुट्टू और सांवक के आटे में पड़ी है। सदर बाजार स्थित दुकानों में इस नवरात्र पर कुट्टू का आटा 150 रुपये, सिंघाड़े का 200 रुपये और सांवक के आटे के दाम प्रतिकिलो 100 रुपये किलो मिल रहा है। इन सभी के दामों में 10-15 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। लाला का बाजार के व्यापारियों की माने तो नवरात्र पर मांग अधिक होने के कारण सिंघाडे, कुट्टू और सांवक के आटे के दाम बढ़ गए हैं। इसी तरह से पूजा के सामान और चुनरी के दामों में भी पांच से दस रुपये की वृद्धि हुई है।

भक्ति का माहौल को महंगाई ने किया फीका

नवरात्र की शुरुआत के साथ ही शहर में भक्ति का माहौल बनने लगता था। घर-घर देवी की अर्चना की तैयारियां शुरू होती थी। लोग व्रत भी रखते थे लेकिन महंगाई के चलते अब आम आदमी को फलाहार से लेकर फलों की दुकानों पर जाने में भी डर रहा है। आस्था के इस पर्व को भी महंगाई ने अछूता नहीं छोड़ा गरीब परिवार के भक्तों के लिए यह महंगाई उनके बजट को प्रभावित करने बाली कही जा रही है।

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