
मेरठ. मेरठ के शास्त्रीनगर इलाके में पूरे जोन के युवाओं को एसडीपीआई और पीएफआई से जोड़ने की मुहिम जोरों से चल रही थी। गत शुक्रवार को हुई हिंसा कोई एक दिन का नतीजा नहीं थी। इसके लिए पिछले छह महीने से गुपचुप तरीके से तैयारी चल रही थी। इसकी पुष्टि खुद मेरठ के एसएसपी अजय साहनी ने की है। मजे की बात शहर की पॉश कालोनी में यह सब हो रहा था और इसकी जानकारी न तो थाना पुलिस को हो सकी और न ही खुफिया विभाग समय रहते दंगे के खतरों को भांप सका। पश्चिम उत्तर प्रदेश में खासकर मेरठ और मुजफ्फरनगर में हिंसा फैलाने के पीछे एसडीपीआई और पीएफआई का हाथ है।
एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि अभी पकड़े गए लोगों से पूछताछ चल रही है। उन्होंने कहा कि उपद्रवियों को उकसाने के लिए दोनों संगठनों ने पर्चे छपवाकर सोशल साइट्स पर अपलोड किए। कुछ आॅटो और ई-रिक्शा के पीछे भी लगाकर प्रचार किया। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके फैजी हैं, जो केरल के रहने वाले हैं। उन्हीं ने हापुड़ के मोती काली सिकंदर गेट निवासी नूर हसन पुत्र आमिर को प्रदेश सचिव बनाकर वेस्ट यूपी में मेरठ ऑफिस खोला। उसे ऑफिस का सचिव भी बनाया। नूर हसन ने अपने साथ हमीरपुर के फरसो लियाना राढ निवासी अब्दुल मुईद हाशमी पुत्र अब्दुल भुनिश हाशमी को अपने साथ लिया। उसके बाद दोनों ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के प्रदेश अध्यक्ष आबिद उर्फ परवेज से हाथ मिलाया। फिर मेरठ और मुजफ्फरनगर में हिंसा फैलाने की पटकथा तैयार की।
एसएसपी ने बताया कि शास्त्रीनगर के ऑफिस से आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। कुछ पर्चे उक्त संगठनों ने सोशल साइट्स पर भी डाले थे। साथ ही शहर की आॅटो और ई-रिक्शा पर भी लगाकर लोगों को उत्तेजित किया था। दोनों शहर के युवाओं को भ्रमित किया। इतना ही नहीं बाहर से बवाली बुलाने के बाद शहर के युवाओं को उनके साथ खड़ा कर हिंसा को जन्म दिया है। पुलिस नूर हसन को रिमांड पर अन्य जानकारी भी जुटाएगी। साथ ही कुछ अन्य युवकों के भी नाम सामने आए है, जिनकी धरपकड़ को टीम बना दी है।
Published on:
29 Dec 2019 04:58 pm
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