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खेल दिवस पर प्रेरणा देती है पारूल की कहानी, DSP बनीं… सीएम ने 4.5 करोड़ की राशि से किया सम्मानित

National Sports Day : एक साधारण परिवार में जन्मीं बेटी पारूल चौधरी। पिता खेती किसानी करते... इन्हें पगडंडियों से शुरू हुआ जुनून का सफर और जापान तक पहुंचा। पारूल ने यहां स्वर्ण पदक जीता और देश का नाम रौशन किया।

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File Photo PC- @UPGovt

29 अगस्त, 2025 को राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर मेरठ की उड़नपरी पारुल चौधरी की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा बन रही है। उत्तर प्रदेश की इस एथलीट बेटी ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल एशियाई खेलों में स्वर्ण और रजत पदक जीता, बल्कि योगी सरकार से साढ़े चार करोड़ रुपये की इनाम राशि और डीएसपी का पद भी हासिल किया।

पारुल चौधरी ने 2023 में चीन में आयोजित एशियाई खेलों में 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। 5000 मीटर की दौड़ में अंतिम 40 मीटर में जापान की रिरिका हिरोनाका को पछाड़कर उन्होंने 15 मिनट 14.75 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि उन्हें इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनाती है। उनकी रणनीति और आखिरी क्षणों में दिखाई गई तेजी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा।

मेरठ के एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली पारुल का जीवन संघर्षों से भरा रहा। पिता कृष्णपाल सिंह और बड़ी बहन प्रीति के साथ गांव की टूटी-फूटी सड़कों पर दौड़ने से शुरू हुआ उनका सफर कोच गौरव त्यागी की मदद से स्टेडियम तक पहुंचा। सुबह 5 बजे टेम्पो या अन्य साधनों से स्टेडियम पहुंचकर प्रैक्टिस करने वाली पारुल ने कभी हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाने वाला सितारा बना दिया।

28 जनवरी, 2024 को लखनऊ के इंदिरा भवन में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पारुल को साढ़े चार करोड़ रुपये का चेक और डीएसपी का नियुक्ति पत्र सौंपा। योगी ने पारुल सहित अन्य खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि इनके प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश और देश का मान बढ़ाया है। इस मौके पर 189 खिलाड़ियों को 62 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी गई, जिसमें पारुल को सबसे अधिक राशि मिली।

राष्ट्रीय खेल दिवस, जो हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाया जाता है, खेल और खिलाड़ियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। पारुल चौधरी जैसी खिलाड़ी इस दिन की भावना को साकार करती हैं। उनकी कहानी युवाओं को यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और लगन से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।