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Nirbhaya Case: पवन जल्‍लाद को मिलती है इतनी सैलरी, दोषियों को फांसी देने के बाद अब करेंगे अपनी बेटी की शादी

Highlights 20 मार्च की सुबह चारों दोषियों को दी गई फांसी फांसी देने के बाद मिलने वाले रुपयों से करेंगे बेटी की शादी पांच बेटे और दो बेटियां हैं पवन जल्‍लाद की

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मेरठ

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sharad asthana

Mar 20, 2020

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मेरठ। निर्भया (Nirbhaya) के दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने से पूरा देश खुश है। जिस जल्लाद (Jallad) ने चारों को फांसी पर लटकाया है, उसको दोगुनी खुशी है। निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के बाद पवन (Pawan Jallad) दूसरी अब अपनी बेटी की शादी कर सकेंगे। वह बड़ी बेसब्री से इस फांसी का इंतजार कर रहे थे। उन्‍होंने कहा था कि फांसी देने के बाद उनको 2 लाख रुपये मिलेंगे। इनसे वह अपनी बेटी के हाथ पीले कर सकेंगे।

शुक्रवार सुबह दी गई फांसी

बता दें कि पवन जल्‍लाद को एक बताया गया था कि एक फांसी के बदले में उसको 50 हजार रुपये मिलेंगे। पवन जल्लाद ने चार दोषियों को फांसी पर लटकाया है। पवन देश ही नहीं विश्व के भी एकमात्र ऐसे जल्लाद हो गए हैं, जिन्‍होंने एक साथ चार दोषियों को फांसी पर लटकाया है। उनका नाम इतिहास में लिखा जाएगा। चारों दोषियों को शु्रकवार (Friday) सुबह साढ़े 5 बजे फांसी दी गई है। पवन जल्लाद के परिवार में नौ सदस्य हैं। उनके सात बच्चे हैं। इनमें पांच बेटी और दो बेटे हैं। वह चार बेटियों की शादी कर चुके हैं। अभी एक बेटी और दो बेटों की शादी होनी है। पिता पवन द्वारा निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने से बच्चे भी खुश हैं।

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चार पीढ़‍ियों से चल रहा है यह पेशा

मेरठ निवासी पवन कुमार का परिवार चार पीढ़ियों से इस काम से जुड़ा हुआ है। पिता मम्‍मू अब तक कई दोषियों को फंदे पर लटका चुके हैं जबकि दादा कालूराम पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और केहर सिंह को फांसी दे चुके हैं। इनके अलावा रंगा और बिल्ला को भी कालूराम ने ही फंदे पर लटकाया था। लेकिन पवन जल्लाद ने अभी तक एक भी दोषी को फांसी नहीं लगाई है। उसने पहली बार एक साथ चार दोषियों को फांसी पर लटकाया।

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दो हजार रुपये बढ़े सैलरी में

56 वर्षीय पवन कुमार मेरठ के कांशीराम आवासीय कॉलोनी में रहते हैं। इनका असली नाम सिंधी राम है। जिस घर में पवन कुमार रहते हैं, उसमें चारों तरफ भगवान की तस्वीरें लगी हुई हैं। पवन कुमार निर्भया के दोषियों को फंदे पर लटकाने को लेकर अपनी तैयारियां काफी समय से कर रहे थे। तिहाड़ जेल प्रशासन पहले ही मेरठ जेल प्रशासन को एक पत्र भेज चुका था। गत तीन दिन पहले ही एक और पत्र आया था, जिसके बाद पवन को दिल्ली तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। पवन का कहना था कि उसने पिछले साल सरकार से 20 हजार रुपये महीना तनख्वाह देने की मांग की थी लेकिन सरकार ने सिर्फ दो हजार रुपये ही बढ़ाए। अब उन्हें पांच हजार रुपये महीना मिलते हैं। इसमें उसका गुजारा चलाना बहुत मुश्किल होता है।