
Cold fever
मेरठ। दुनिया भर में तीसरी सबसे घातक रोग है COPD (chronic obstructive pulmonary disease)। सीओपीडी को हमेशा धूम्रपान (Smoking) करने वालों का रोग माना जाता रहा है, लेकिन अब यह धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। मेरठ में कम से कम एक-चौथाई ऐसे मरीज सीओपीडी से ग्रस्त हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है, यह कहना है छाती रोग विशेषज्ञ डा. वीरोत्तम तोमर का। World COPD Day नवंबर महीने के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि विकासशील देशों में सीओपीडी से होने वाली करीब 50 प्रतिशत मौतें बायोमास (Biomass) के धुएं के कारण होती हैं। जिसमें से 75 प्रतिशत महिलाएं हैं।
बायोमास जैसे-लकड़ी, पशुओं का गोबर, फसल के अवशेष, धूम्रपान करने जितना ही जोखिम पैदा करते हैं। इसीलिए महिलाओं में सीओपीडी की करीब तीन गुना बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर ग्रामीण इलाकों में महिलाएं और लड़कियां रसोईघर में अधिक समय बिताती हैं। उन्होंने कहा कि आज देश खतरनाक गैस का चेंबर बन गया है। इसके कारण भी सीओपीडी बीमारी फैली है।
बायोमास के अलावा, वायु प्रदूषण की मौजूदा स्थिति ने भी शहरी इलाकों में सीओपीडी को चिंता का सबब बना दिया है। वायु प्रदूषण की दृष्टि से दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित 20 शहरों में से 10 भारत में हैं। सीओपीडी को बढ़ाने के कुछ और कारण भी हैं। जिनमें एग्रीकल्चरल पेस्टीसाइड्स और मच्छरों को भगाने वाला मॉस्क्वीटो कॉइल है। डा. तोमर ने कहा कि जानकर हैरानी होगी कि एक मॉस्क्वीटो कॉइल में 100 सिगरेट जितना धुंआ (पीएम 2.5) निकलता है और 50 सिगरेट जितना फॉर्मेल्डिहाइड निकलता हैं। उन्होंने बताया कि आज जरूरत है धूम्रपान को छोड़ने की। इसी के कारण सीओपीडी घातक और जानलेवा के रूप में तब्दील हो जाता है।
Published on:
20 Nov 2019 10:32 am
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