
मेरठ। एक तरफ वन विभाग (Forest Department) प्रतिवर्ष लाखों पेड़ों (Trees) को लगाने की बात करता है तो दूसरी ओर इसी विभाग की मदद से वन माफिया और बिल्डर पर्यावरण (Environment) को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं। पेड़ों से मिलने वाली शुद्ध हवा ऑक्सीजन आज की प्रदूषण (Pollution) से घिरी जिंदगी में किसी संजीवनी से कम नहीं है, लेकिन जो विभाग पेड़ों का रखवाला है उसी की बदौलत इन पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाई जा रही है।
बीती सोमवार को हनी गोल्फ और मोती प्रयाग कालोनी में पेड़ों की कटान देखकर स्थानीय लोगों ने हंगामा कर दिया। मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री के पोर्टल तक शिकायत की गई। आखिरकार डीएम के निर्देश पर डीएफओ ने पेड़ों की कटान रुकवा दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डर पेड़ों को रोग ग्रस्त बताकर कटवा रहे हैं, जिसमें सरकारी विभागों की मिलीभगत है। सोमवार को काफी देर तक हंगामा चलने के बाद अधिकारियों में भी हलचल मच गई। वन विभाग एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ लोगों ने बहस की। एनवायरमेंट सोसाइटी के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। इधर, डीएम के पास शिकायत पहुंचने पर उन्होंने वन विभाग से रिपोर्ट तलब की। डीएफओ अदिति शर्मा ने पेड़ों का कटान रुकवा कर जांच बिठा दी है।
गढ़ रोड पर हनी गोल्फ और मोतीप्रयाग कालोनी में पेड़ों की कटान पर भड़के लोगों ने बताया कि बिल्डरों के इशारे पर पेड़ों को रोगग्रस्त बताकर काटा जा रहा था। एडवोकेट रामकुमार शर्मा ने लोगों के साथ मिलकर हंगामा किया। हालांकि तब तक बड़ी संख्या में पेड़ों को धराशायी किया जा चुका था। सैकड़ों की संख्या में पेड़ों को काटा जा चुका था। वहीं इस बारे में डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि इन पेड़ों के कटान के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। इसकी जांच करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि उनके पास स्टाफ काफी कम है। जिसके कारण पूरे जिले की निगरानी करना काफी मुश्किल है। जांच बैठा दी गई है। रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
19 Nov 2019, 11:08 AM IST
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