11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मिर्जापुर

इस एक व्यवस्था के चलते लाखों बच्चों को नहीं मिले स्वेटर, ठंड में आ रहे स्कूल

डिजिटल पोर्टल के चलते लाखों स्कूली बच्चों को नहीं मिला स्वेटर, शासन ने व्यवस्था सही होने तक रोक दी है निविदा।

Google source verification

मिर्ज़ापुर. यूपी सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में ठंड कि शुरुआत से पहले ही बच्चों को स्वेटर देने कि घोषणा कि गयी थी। पर दिसंबर का आधा महीना बीत जाने के बाद भी अब तक किसी स्कूल में स्वेटर कि सप्लाई नहीं हो पाई है। अब सरकारी अधिकारी पूरी नाकामी का ठीकरा सरकारी खरीद के लिए बनाए गए डिजटल पोर्टल ‘जेम’ पर फोड़ रहे हैं। डिजटल पोर्टल के चलते जिले के लाखों बच्चों को ठंड में बिना स्वेटर के ही स्कूल आना पड़ रहा है। बतादें कि स्कूलों में स्वेटर सप्लाई न होने के चलते अध्यापक बच्चों को धूप में बैठाकर पढ़ा रहे हैं।

 

पत्रिका कि टीम जब सिटी ब्लाक के विकना प्राइमरी स्कूल पहुंची तो वहां छोटे बच्चे बाहर धूप में पढ़ते मिले। स्कूल की अध्यापिका फरहान नाज ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए कहा कि छोटे बच्चों को बोला गया है कि घर से स्वेटर पहन कर आयें, लेकिन जो नहीं पहन कर आते है उन्हें बाहर धूप में बैठाना पड़ता है। वहीं स्कूल में कक्षा पांच में पढ़ने वाली छात्र आंचल और ज्योति ने कहा कि स्कूल में आने के बाद जब उन्हें ठंड लगती है तो मैडम धूप में बैठा कर पढ़ाती हैं। यही हाल जिले के तकरीबन सभी प्राइमरी सरकारी स्कूलों का है।

 

स्कूलों में अभी तक स्वेटर नही वितरण किये जाने पर जबाब देते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण तिवारी ने समस्या के लिए पोर्टल ‘जेम’ को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि हमारे जिले में स्वेटर खरीदने के लिए जो शासनादेश आया था। उसके मुताबिक पोर्टल ‘जेम’ पर रजिस्ट्रेशन हुआ। उस पर रिवर्स ऑक्शन भी हुआ पर 67 रूपये का एक व वेंडर का रेट 66 रूपये आया जो काफी कम था पोर्टल पर कीमत को अव्यवहारिक देख अधिकारियों ने खरीद में आ रही समस्या को लेकर शासन को अवगत कराया दिया। शासन से व्यवस्था सही होने तक स्वेटर खरीद रोकने का निर्देश मिला। पोर्टल पर स्वेटर खरीद में हर जिले में समस्या की खबर शासन को पहले ही मिल गयी थी। बावजूद इसके समय पर अधिकारियों की ओर से कोई कदम नहीं उठाये गए। इसकी वजह से सर्दियों के शुरुआत होने के बाद भी स्कूलों में स्वेटर कि आपूर्ति नही हो पाई और सरकार कि किरकिरी हो गयी।
by Suresh Singh