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दिल्ली के 74 स्कूलों ने तोड़ा RTE कानून! एक भी गरीब बच्चे को नहीं दिया दाखिला

यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम का सीधा-सीधा उल्लंघन है, क्योंकि कानून के मुताबिक 25 फीसदी गरीब बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है।
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दिल्ली के 74 स्कूलों ने तोड़ा RTE कानून! एक भी गरीब बच्चे को नहीं दिया दाखिला

नई दिल्ली। दिल्ली में शिक्षा की चमकती तस्वीर और सुर्खियां बटोरते शिक्षा तंत्र के बीच पर एक काला धब्बा लग गया है। दिल्ली के निजी स्कूलों से जुड़ी एक दिल्ली कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के 74 निजी स्कूलों ने पिछले दो सालों में गरीब तबके के एक भी बच्चे को एडमिशन नहीं दिया। यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम का सीधा-सीधा उल्लंघन है, क्योंकि कानून के मुताबिक 25 फीसदी गरीब बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है।

...क्या कहता है शिक्षा का अधिकार कानून

कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक 2016-17 में 48 निजी स्कूलों ने तय वर्ग के तहत एक भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया। वहीं 2017-18 में इनमें से 7 स्कूलों ने गरीब बच्चों का दाखिला नहीं लिया जबकि दो सालों में 19 स्कूल आरटीई मापदंडों का पालन करने में असफल रहे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा-12 (1) सी के तहत निजी स्कूलों में 25 फीसदी गरीब बच्चों को आरक्षण का लाभ देना अनिवार्य है। कमीशन ने शिक्षा निदेशालय को इस संबंध में जानकारी दी है। निदेशालय ने मामले से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं।

शिक्षा निदेशालय ने कहा जांच के बाद करेंगे टिप्पणी

कमीशन के मुताबिक करीब नौ महीने के अध्ययन के बाद यह जानकारी सामने आ पाई है। कमीशन के सदस्य का कहना है कि रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल शिक्षा निदेशालय की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। शिक्षा निदेशालय के डायरेक्टर संजय गोयल ने कहा, 'जानकारी को इकट्ठा किया गया है, इसमें कुछ दिनों का समय लगेगा, इसके बाद ही मैं टिप्पणी कर सकूंगा। हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि कमीशन को जानकारी दें या न दें, कमीशन यह काम करने के लिए अधिकृत है या नहीं है।'

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