
नसीरुद्दीन शाह के साथ खड़ा हुआ बॉलीवुड, आशुतोष राणा और मधुर भंडारकर बोले- लोगों को अपनी बात कहने का हक
नई दिल्ली। देश के महल पर बयान देकर घिरे नसीरुद्दीन शाह के साथ धीरे-धीरे समूचा बॉलीवुड खड़ा हो रहा है। फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और जाने माने निर्देशक मधुर भंडारकर अब नसीरुद्दीन शाह के बचाव में उतरे हैं। दोनों ने साफ़ तौर पर इस बात का समर्थन किया है कि ने कहा है कि हर को हर किसी को बिना किसी डर के अपने दोस्तों या अन्य लोगों के साथ अपने विचार साझा करने का अधिकार होना चाहिए। अगर देश का कोई नागरिक अपनी बात कहता है तो हमें उसकी बात सुननी चाहिए।
मन की बात कहने का अधिकार
अभिनेता आशुतोष राणा और निर्देशक मधुर भंडारकर ने नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। नसीरुद्दीन शाह के बयान पर बोलते हुए आशुतोष राणा ने कहा है कि लोगों को अपने मन की बात कहने का अधिकार है। बॉलीवुड अभिनेता आशुतोष राणा ने शाह का पक्ष लिया और आग्रह किया कि किसी को इस पर प्रतिक्रिया देने के बजाय बयान पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हर किसी को बिना किसी डर के अपने दोस्तों या अन्य लोगों के साथ अपने विचार साझा करने का अधिकार होना चाहिए। हमें ऐसी किसी भी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देने या उसका परीक्षण करने से पहले सावधान रहना चाहिए। यदि हमारा कोई भाई या दोस्त कुछ कह रहा है, तो हमें सुनना चाहिए।" अभिनेता ने कहा, "स्वतंत्रता का मतलब सादगी और सौम्यता है और यही हमारी संस्कृति है।"
कायम रहे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
बुलंदशहर हिंसा की घटना पर नसीरुद्दीन शाह की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए फिल्म निर्माता मधुर भंडारकर ने कहा, "हर किसी को अपने विचार साझा करने का अधिकार है।" भंडारकर ने कहा कि चूंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, इसलिए कोई भी अपनी राय व्यक्त कर सकता है। हालांकि उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि देश में कोई असहिष्णुता नहीं है। उन्होंने कहा, "हर किसी को बोलने का अधिकार है। हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई डर है। हर कोई भारत में समान है और यह उसका दृष्टिकोण है। यह हमारे देश की खास बात है कि हर कोई बिना डर या झिझक के अपनी राय व्यक्त कर सकता है। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मुझे नहीं लगता कि देश में असहिष्णुता जैसी कोई समस्या है।"
कुछ भी गलत नहीं किया
उधर दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का कहना है कि एक चिंतित भारतीय के रूप में में अपनी चिंताओं को उठाया है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। बता दें कि नसीर ने कहा था कि कई स्थानों पर एक पुलिसकर्मी की हत्या की तुलना में गाय की मृत्यु को अधिक महत्व दिया जा रहा है।उन्होंने कहा था कि मैं अपने बच्चों के लिए चिंतित हूं क्योंकि कल अगर कोई भीड़ उन्हें घेर लेती है और पूछती है, 'क्या आप हिंदू हैं या मुसलमान?' उनके पास इसका कोई जवाब नहीं होगा।
Updated on:
24 Dec 2018 10:37 am
Published on:
24 Dec 2018 08:13 am
