script145 साल पुराना असम-मिजोरम विवाद खत्म होने के आसार, सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए तय होंगी सीमाएं | Assam-Mizoram Border Dispute: 145 years old issue likely to end | Patrika News

145 साल पुराना असम-मिजोरम विवाद खत्म होने के आसार, सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए तय होंगी सीमाएं

locationनई दिल्लीPublished: Aug 05, 2021 07:42:21 pm

Submitted by:

Dhirendra Mishra

मिजोरम सरकार बंगाल ईस्टर्न फ़्रंटियर रेगुलेशन (बीइएफ़आर) एक्ट 1873 के तहत 1875 में जारी अधिसूचना को तो असम सरकार 1933 में जारी नोटिफिकेशन को सीमा का आधार मानती है। मिजोरम के लोगों का कहना है कि 1933 में सीमा निर्धारण के समय उनसे सलाह मशविरा नहीं किया गया था।

assam-mizoram border dispute
नई दिल्ली। असम और मिजोरम के बीच 145 साल पुराना सीमा विवाद बातचीत के जरिए जल्द सुलझने के आसार हैं। गुरुवार को द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों राज्य सरकारों ने साझा बयान जारी का इस बात का भरोसा दिया है। माना जा रहा है कि सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाएं तय करने का फैसला लिया गया है। असम-मिजोरम सीमा विवाद ( Assam Mizoram Border Dispute ) सामने आने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सैटेलाइट इमेजिंग ( Satellite Imaging ) का प्रस्ताव दोनों राज्य की सरकारों के सामने रखा था। साझा बयान में भी यही कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ( Union Home Ministry ) द्वारा उठाए गए कदमों को आगे ले जाएंगे और दोनों मुख्यमंत्री राज्यों की सीमा पर पैदा हुए तनाव को बातचीत के जरिए सुलझाएंगे।
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सैटेलाइट इमेजिंग पर सहमति

असम और मिजोरम के बीच सीमा विवाद के बाद केंद्र ने सैटेलाइट इमेजिंग ( Satellite Imaging ) के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाएं तय करने का फैसला लिया था। जिस पर दोनों राज्य की सरकारों ने अपनी सहमति जता दी है। सरकार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सैटेलाट इमेजिंग के जरिए सीमा विवाद सुलझाने पर सहमति इसलिए बनी है कि यह तरीका वैज्ञानिक है। इसलिए इसमें गलती की गुंजाइश कम होगी।
सीआरपीएफ की तैनाती का स्वागत

असम-मिजोरम सरकार ( Assam Mizoram Government ) की ओर से गुरुवार को जारी साझा बयान मुताबिक दोनों राज्य सीमावर्ती इलाकों में शांति स्थापित करने को लेकर राजी हुए हैं। केंद्र की ओर से सीआरपीएफ तैनात करने के फैसले का भी स्वागत किया है। गुरुवार को हुई द्विपक्षीय बैठक में असम की ओर से वरिष्ठ मंत्री अतुल बोरा और मिजोरम की ओर से गृह मंत्री लालचमलियाना बैठक में शामिल हुए।
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26 जुलाई को हुई थी 6 लोगों की मौत

इससे पहले 26 जुलाई 2021 को असम-मिजोरम सीमा पर गोलीबारी के बाद दोनों राज्यों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया गया था। गोलीबारी में 6 पुलिसकर्मियों और एक आम नागरिक की मौत हुई थी। 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इस घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दखल देते हुए दोनों राज्यों की सीमा पर पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करने का आदेश दिया था।
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क्या है असम-मिजोरम सीमा विवाद?
असम-मिज़ोरम के बीच यह विवाद 1875 की एक अधिसूचना की पैदाइश है। अधिसूचना लुशाई पहाड़ियों को कछार के मैदानी इलाकों से अलग करता है। वर्तमान में मिजोरम और असम आपस में 164.6 किलोमीटर सीमा साझा करते हैं। 1972 से पहले मिजोरम असम का ही हिस्सा था। यह लुशाई हिल्स नाम से असम का एक जिला हुआ करता था जिसका मुख्यालय आइजोल था। जब मिजोरम लुशाई हिल्स से नाम से असम का हिस्सा था तब भी इसकी मिजो आबादी और लुशाई हिल्स का क्षेत्र निश्चित था। मिजोरम सरकार अधिसूचना के आधार पर अपनी सीमा का दावा करती है। असम सरकार इसे नहीं मानती है। असम सरकार 1933 में चिन्हित की गई सीमा के मुताबिक अपना दावा करती है। विवाद की असली जड़ एक-दूसरे पर ओवरलैप 1318 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा है, जिस पर दोनों सरकारें दावा छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
दरअसल, 1875 का नोटिफ़िकेशन बंगाल ईस्टर्न फ़्रंटियर रेगुलेशन एक्ट, ( BEFR Act ) 1873 के तहत आया था। जबकि 1933 में जो नोटिफ़िकेशन आया उस वक्त मिजो समुदाय के लोगों से सलाह मशविरा नहीं किया गया था। इसलिए मिजो लोग 1933 के नोटिफ़िकेशन का विरोध करते हैं।

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