
नई दिल्ली। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में काला पानी की सजा की कहानी आप आज भी अपने बुजुर्गों से सुनते होंगे। आखिर ऐसा क्या था इस सजा में जो आज तक इसकी चर्चा की जाती है? क्यों इसे भारतीय इतिहास की क्रूरतम श्रेणी में गिना जाता है? आइए आज हम आपको विस्तृत रूप से बताते हैं आखिर काला पानी की सजा है क्या? काला पानी एक द्वीप है जो अंडमान निकोबार द्वीप समूह का हिस्सा है। शायद आप न जानते हों कि हिंद महासागर में स्थित अंडमान निकोबार द्वीप समूह में कुल 572 द्वीप हैं। इनमें से 38 द्वीप ही हैं जो रिहायशी हैं। काला पानी के काले इतिहास की गवाही यहां की दीवारें चीख-चीखकर देती हैं। यूं तो यह छोटा सा द्वीप तभी तक खूबसूरत दिखता है जबतक कोई इसका इतिहास ना जाने। काला पानी को अंग्रेजों की भाषा सेल्युलर जेल कहा जाता था। इस जेल का इस्तेमाल ब्रिटिश काल में राजनीतिक कैदियों को रखने के लिए किया जाता था।
यहां जाने पर आपको 19वीं सदी के ब्रिटिश राज के खंडहर, हिंदुस्तान के काले अध्याय को दोहराते दिखेंगे। कहने को आज यह एक राष्ट्रीय स्मारक में तब्दील कर दिया गया है लेकिन जिस तरह से जंगल इसे अपनी आगोश में ले रहा है मानों ये सेल्युलर जेल किसी श्राप से जूझ रही हो। भारत के इतिहास पर गौर करें तो 1857 में आजादी के पहले संग्राम के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने बागियों को इस वीरान द्वीप पर लाकर कैद करने की योजना बनाई थी। इतिहासकारों के मुताबिक, 1858 में एक जहाज 200 बागियों को लेकर अंडमान के इस द्वीप पर पहुंचा। उस समय यहां केवल जंगल ही जंगल थे।
काला पानी या सेल्युलर जेल का निर्माण 1896 में शुरू हुआ और अंततः 1906 में पूरा बनकर तैयार हुआ। 7 हिस्सों में बंटी इस जेल में इस्तेमाल की गई ईंटें बर्मा से मंगाई गई थीं। अंग्रेजों की हुकूमत खत्म होने के बाद इसे ध्वस्त कर दो भागों में कर दिया गया। आपको जानकारी के लिए बता दें काला पानी जेल अंग्रेजों के दिमाग की उपज तो थी लेकिन इसे बनाने की जिम्मेदारी यहां के कैदियों पर थी। यह जेल उन्होंने अपने खून-पसीने से तैयार की थी, शायद यही कारण है आज इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया गया। कैदियों की मेहनत से ये रॉस द्वीप आबाद हुआ। यहां अधिकारियों के बंगले, टेनिस कोर्ट, चर्च और पानी साफ करने का प्लांट, सेना के बैरक और एक अस्पताल भी बना।
जानकारी के लिए बता दें, काला पानी जेल में कुल 693 कमरे हुआ करते थे। यहां के सेल बहुत छोटे थे और रोशनी की नाम पर छत के पास बस एक रोशनदान। ऊपर से नीचे जंजीरों में पटे बागियों के लिए यह बस नरक मात्र था। जंजीरों में लिपटे कैदी इमारतें बनाते, जंगल साफ करते और नारियल का तेल निकालते ही नजर आते। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान देने वाले वीर सावरकर, डॉ. दीवान सिंह, योगेंद्र शुक्ल, भाई परमानंद, सोहन सिंह, वामन राव जोशी और नंद गोपाल जैसे लोगों को काला पानी की सजा सुनाई गई थी। 1969 में एक राष्ट्रीय स्मारक में तब्दील काला पानी को अब भारतीयों के लिए "स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के प्रतीक" के रूप में देखा जाता है।
Published on:
16 Mar 2018 03:29 pm
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