
नई दिल्ली। निजी अस्पतालों के लंबे-चौड़े बिल से लोगों को बचाने के लिए दिल्ली सरकार एक और कदम उठाने जा रही है। इसी हफ्ते केजरीवाल सरकार अस्पतालों की कमाई पर लगाम कसेगी। दिल्ली ऐसा पहला राज्य है जहां इस तरह की पॉलिसी बनने जा रही है जिसमें दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की बिक्री पर भी नजर रखी जाएगी। दिल्ली सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सुझावों हेतु नौ लोगों की एक समिति बनाई थी।
समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट
हाल ही में डेंगू से पीड़ित एक बच्ची की निजी अस्पताल में मौत हो गई थी जिसके बाद अस्पताल ने परिजनों को 15 लाख रुपए से ज्यादा का बिल थमा दिया। इसी तरह के कुछ और मामले भी सामने आए थे, जिसके बाद लोगों में काफी गुस्सा देखा गया था। इसके चलते अस्पताल का लाइसेंस भी रद्द करना पड़ा था। दिल्ली सरकार की कमेटी में इंडियन मेडिकल काउंसिल एसोसिएशन के सदस्य और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कुछ अन्य ब्यूरोक्रेट्स को भी शामिल किया गया था। समिति के एक सदस्य ने कहा कि उन्होंने सरकार को इस संबंध में एक महीने पहले ही रिपोर्ट सौंप दी है।
ये हैं समिति की सिफारिशें
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंत्र जैन अगले हफ्ते इस पॉलिसी को लागू कर सकते हैं। सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक समिति ने कई सिफारिशें की हैं। जिनमें,
- दवाओं, इलाज और अन्य चिकित्सकीय उपकरणों की लागत पर अधिकतम 50 फीसदी लाभ तय किया जाए।
- इलाज के दौरान होने वाली जांचों और अन्य प्रक्रियाओं के लिए भी लाभ की सीमा तय की जाए।
- इलाज के लिए मिलने वाले पैकेज में पारदर्शिता बरती जाए, इन्हें जटिल बनाकर इलाज के दौरान महंगा ना किया जाए।
16.5 गुना सस्ता हो सकता है इलाज
फार्मा इंडस्ट्री में मुनाफे के तौर पर बेलगाम तरीके से पैसे वसूले जा रहे हैं। नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने खुलासा किया था कि कई अस्पताल इलाज की लागत पर 10 से 17 गुना तक लाभ कमा रहे हैं। यानी जिस सेवा या उत्पाद की लागत 100 रुपए है उस पर 1700 रुपए का मुनाफा कमाया जा रहा था। उस स्थिति में ग्राहक को 100 रुपए की सेवा के लिए 1800 रुपए चुकाने पड़ रहे थे। लेकिन यदि समिति की सिफारिशें लागू हो गई तो 100 रुपए की सेवा पर अधिकतम 50 रुपए कमाए जा सकेंगे। इस तरह से ग्राहक या मरीज को 150 रुपए ही चुकाने होंगे। यानी सीधे-सीधे मुनाफा 1700 फीसदी से घटकर 50 फीसदी पर आएगा तो 1650 फीसदी (साढ़े 16 गुना) दाम कम हो जाएंगे।
...इन सवालों का नहीं मिल रहा जवाब
दिल्ली सरकार के इस कदम की हर तरफ तारीफ हो रही है। लेकिन सरकार यह कैसे तय करेगी कि किसी प्रोडक्ट को बनाने की मूल लागत (एक्स फैक्ट्री) क्या है? क्योंकि अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। क्या दवाओं की बिक्री पर मार्जिन सीमित करने का फैसला अस्पतालों के बाहर मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली दवाओं पर भी लागू होगा?
Published on:
06 May 2018 12:32 pm
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