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दिल्ली के फैसले से अन्य राज्यों को ले​ना चाहिए सबक, मरीजों को मिलेगी राहत

अस्पतालों की मनमानी और बिलों में अनावश्यक बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है।
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Mohit Saxena

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May 29, 2018

hospital

दिल्ली के फैसले से अन्य राज्यों को ले​ना चाहिए सबक, मरीजों को मिलेगी राहत

नई दिल्ली। निजी अस्पतालों में अब इलाज कराना इतना महंगा हो गया है कि मरीज को इसके लिए अपनी सारी जमा पूंजी भी लगानी पड़ सकती है। अस्पतालों की मनमानी और बिलों में अनावश्यक बढ़ोतरी को लेकर दिल्ली सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है। इसके लिए एक ड्राफ्ट एडवाइजरी तैयार किया है। एक्सपर्ट कमिटी के नौ सदस्यों ने यह रिपोर्ट बनाई है। इसके लागू होने के बाद अस्पतालों की हरकतों पर लगाम लगाई जा सकेगी। विशेषज्ञों का मनना है कि इस एक्ट को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाना चाहिए।छोटे राज्यों में मरीजों की स्थिति ज्यादा खराब है। यहां पर निजी अस्पताल पैसा बनाने के लिए मरीजों को भर्ती तो कर लेते हैं मगर जब केस बिगड़ता है तो इन मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर कर देते हैं। इस बीच यह मरीजों से मोटी कमाई करते हैं।राज्य सरकारों को इस एक्ट से सबक लेना चाहिए ताकि मरीजों बेहतर इलाज कम खर्च में मिल सके।

क्या है एक्ट

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के अनुसार इस एक्ट की मदद से निजी अस्पतालों में दवाई की ज्यादा कीमतों पर लगाम लगाई जा सकती है। उनका कहना कि मरीजों से सौ रुपये के इंजेक्शन के बदले हजार रुपये,400 रुपये की दवाई के बदले 3 हजार रुपये तक वसूले जाने की शिकायतें मिली हैं। अब दवाई के खरीद मूल्य पर मुनाफे के साथ सर्जरी के बिलों में भी कमी होगी। इलाज में काम न आने वाली दवाइयों के बिल को भी नहीं जोड़ा जा सकेगा।

कई मामले आए हैं सामने

बीते वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें अस्पताल ने मरीज को जमकर लूटा और उनका इलाज भी ढंग से नहीं किया। पिछले साल हरियाणा में गुड़गांव के एक नामी अस्पताल ने डेंगू के मरीज के इलाज के लिए 16 लाख रुपये का बिल थमा दिया। सात साल की बच्ची को पहले आईसीयू में भर्ती कर दिया गया और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। कुछ दिन रखने के बाद बच्ची की मौत हो गई। इसके बाद माता-पिता को 16 लाख का बिल पकड़ा दिया गया। इसी तरह पिछले साल मैक्स अस्पताल में छह महीने की गर्भवती एक महिला ने जुड़वां बच्चों (एक लड़का और एक लड़की) को जन्म दिया था। जिनमें बच्ची मृत ही पैदा हुई थी। मगर अस्पताल ने बच्चे के माता-पिता को बताया कि दोनों बच्चे मृत पैदा हुए हैं और उन्हें बच्चे एक पोलिथिन बैग में सौंप दिए गए। लेकिन उनके अंतिम संस्कार से ठीक पहले परिवार ने पाया कि दो में से एक बच्चा जीवित है। इन दोनों मामले में भारी हंगामा हुआ। इन अस्पतालों की मान्यता रद करने की मांग की गई।