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मालगोदाम में रखे अनाज के बदले बैंकों से कर्ज ले सकेंगे किसान, 26 सितंबर को शुरू होगी योजना

किसान इस हालत में नहीं होते कि सही कीमत हासिल करने के लिए वे अपनी फसल का कुछ समय तक मालगोदामों में भंडारण कर सकें।

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नई दिल्ली: किसानों को कौड़ियों के भाव पर फसल बेचने के लिए मजबूर होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार एक नई योजना पेश करने जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रीसिप्ट सिस्टम नाम की इस योजना के तहत किसान वेयरहाउस कॉरपोरेशन के गोदामों में जमा अपने अनाज के बदले बैंकों से आसान शर्तों पर कर्ज ले सकेंगे। केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान 26 सितंबर को इस योजना को लांच करेंगे।

केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर किसान फसल उगाने में अपनी सारी जमा पूंजी लगा देते हैं। पास में पैसा न होने की वजह से फसल के तैयार होते ही उन्हें अपनी फसल को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है। ज्यादातर किसान इस हालत में नहीं होते कि सही कीमत हासिल करने के लिए वे अपनी फसल का कुछ समय तक मालगोदामों में भंडारण कर सकें।

किसानों की इस समस्या को दूर करने के लिए मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रीसिप्ट सिस्टम को शुरू करने जा रहा है। इसके तहत किसान वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए) से अधिकृत मालगोदामों में जमा अपने स्टॉक के बदले बैंकों से कर्ज ले सकेंगे। फिलहाल देश में 1152 मालगोदाम डब्ल्यूडीआरए से अधिकृत हैं, जिनकी संख्या में लगातार इजाफा किया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान 26 सितंबर को इस सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर लांच करेंगे।

ये भी फायदे
किसानों को: किसान अपनी फसल को वैज्ञानिक तरीके से स्टोर करने के लिए प्रेरित होंगे, इससे कटाई के बाद फसलों को होने वाली हानि में कमी आएगी।
बैंकों को: इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रीसिप्ट के जरिए बैंक बिना जोखिमके अपने प्राथमिक क्षेत्र में कर्ज देने के अपने लक्ष्य को पूरा कर सकेंगे।
अर्थव्यवस्था को: सिस्टम के सही क्रियान्वयन से खाद्य वस्तुओं की कीमत में अचानक आने वाले उतार-चढ़ावों से मुक्ति मिल सकेगी।