भारत के इन इलाकों में मोबाइल फोन में अब तक इस्तेमाल होती थी विदेशी सिम, सरकार ने लिया यह फैसला

यहां के लोग भारतीय नेटवर्क नहीं होने से चीन अथवा नेपाल की सिम का इस्तेमाल करते थे, जिससे भारतीय रुपया विदेश यानी चीन या फिर नेपाल चला जाता था।

नई दिल्ली।

देश में ऐसे इलाके भी हैं, जहां अब तक मोबाइल फोन में विदेशी नेटवर्क की सिम उपयोग में लाई जाती थी। जी हां, चीन और नेपाल से सटे ऐसे इलाके, जहां अब तक फोन और इंटरनेट नहीं है, सरकार ऐसे इलाकों को वी-सेट के जरिए डिजिटल दुनिया से जोडऩे जा रही है।

भारत सरकार की डिजिटल इंडिया योजना के तहत देश के अंतिम छोर पर बसे कुछ गांवों में पहली बार इंटरनेट सेवा दस्तक देने जा रही है। इससे न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि, भारत सरकार को भी फायदा होने वाला है। इसकी बड़ी वजह यह है यहां के लोग भारतीय नेटवर्क नहीं होने से चीन अथवा नेपाल की सिम का इस्तेमाल करते थे, जिससे भारतीय रुपया विदेश यानी चीन या फिर नेपाल चला जाता था।

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दरअसल, भारत में धारचूला और मुनस्यारी के बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं, जहां फोन सेवा अभी पूरी तरह नहीं शुरू हो पाई है। चीन और नेपाल की सीमा से सटे ऐसे बहुत से इलाके हैं, जहां रहने वाले सैंकड़ों ग्रामीण देश और दुनिया से जुडऩे के लिए चीन या फिर नेपाल की मोबाइल नेटवर्क सेवा के भरोसे थे। हालांकि, केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया योजना शुरू होने के बाद ऐसे इलाकों तक भी भारतीय मोबाइल नेटवर्क सेवा अब पहुंच रही है।

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डिजिटल इंडिया योजना के तहत ही अब सीमा के गांवों को वी-सेट तकनीक से जोड़ा जा रहा है। वी-सेट से जुडऩे के बाद इन गांवों में वाई-फाई कोड लेकर एक साथ दस लोग इंटरनेट से जुड़ सकते हैं। इस सेवा के इन इलाकों तक पहुंचने से आपदा के दौरान भारतीय प्रशासन इन इलाकों तक जल्द से जल्द पहुंच सकेगा और राहत कार्य शुरू कर पाएगा। इस योजना के तहत जिन गांवों में भारतीय इंटरनेट सेवा शुरू हो रही है उनके नाम, दरमा, व्यास, चौंदास और मिलम घाटी है।

Ashutosh Pathak
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