दरअसल मंडल की ओर से वर्ष 1975 में तैयार किए गए इंजन के मॉडल को अपग्रेड किया गया है। उत्तर भारत का पहला ऐसा इंजन तैयार किया गया है जो 15 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के साथ शंटिंग का काम करेगा।
फिलहाल इस इंजन को केवल अंदरूनी कामों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में रेलवे इस सैक्टर में आगे बढ़ेगा और फिर यात्रियों वाले इंजन की भी बैटरियों के साथ चला करेंगे।