
जाट आंदोलन 2016: हिंसा फैलाने के आरोप में चार लोगों को पांच-पांच साल की सजा
नई दिल्ली। वर्ष 2016 में जाट आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के मामले में शुक्रवार को हरियाणा की एक अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए हिंसा में शामिल रहने के आरोप में चार लोगों को पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इन चारों आरोपियों को हिंसा भड़काने और अन्य गतिविधियों में शामिल रहने का दोषी करार देते हुए ये सजा सुनाई है।
IPC की विभिन्न धाराओं के तहत सुनाई गई सजा
आपको बता दें कि अतिरिक्त जिलाऔर सत्र न्यायाधीश आर.के जैन ने दलजीत, राजू, सूरज और विनोद को हिंसा, सरकारी सेवक को दायित्व से रोकने, हमले, आगजनी जैसे मामलों से संबंधित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाने के बाद सजा सुनाई। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये सभी आरोपी सार्वजनिक संपत्ति हानि नियंत्रण कानून और भारतीय वन कानून 1927 के तहत भी दोषी पाए गए हैं। बता दें कि इन सभी आरोपियों सजा के साथ-साथ एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
क्या है पूरा मामला
आपको बता दें कि हरियाणा में जाट समुदाय के लोगों ने ओबीसी कोटे के अंतर्गत शामिल किए जाने की मांग को लेकर फरवरी 2016 आनंदोलन किया था। जाट समुदाय की मांग थी कि सरकारी नौकरी तथा शिक्षा संस्थानों में उन्हें इसका लाभ दिया जाए। जिसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जाट समुदाय में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण को 10 से 20 फीसदी तक बढ़ाने का सुझाव भी दिया लेकिन आंदोलनकारियों ने इसे मानने से इंकार कर दिया और सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किए। इस प्रदर्शन में रोहतक और झज्जर इलाका सबसे अधिक प्रभावित हुआ था। इनके अलावा भिवानी, सोनीपत और हिसार में भी हिंसा फैली थी। प्रदर्शनकारियों ने जगह- जगह वाहनों को आग लगाई।
Published on:
28 Sept 2018 09:37 pm
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