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JNUSU अध्यक्ष आइशी ने की कुलपति को हटाने की मांग, ABVP-RSS को ठहराया जिम्मेदार

कई दिन से आरएसएस-एबीवीपी का कैंपस में हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप। सोमवार को एम्स से डिस्चार्ज किए गए सभी घायल 34 छात्र-छात्राएं। देशभर में जेएनयू हिंसा के विरोध में सड़कों पर आए छात्र-राजनेता।

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jnusu president aishe ghosh

नई दिल्ली। राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार शाम को हुई हिंसा में घायल छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने सोमवार को मीडिया के सामने बयान दिया। घोष ने इस हमले के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को जिम्मेदार ठहराते हुए जेएनयू के कुलपति को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की।

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जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष ने सोमवार को कहा, "हम इसकी निंदा करते हैं और हमारी मांग है कि कुलपति को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।"

घोष ने आगे कहा, "कल की घटना आरएसएस और एबीवीपी के गुंडों द्वारा किया गया एक सुनियोजित हमला था। बीते 4-5 दिनों से आरएसएस से जुड़े कुछ प्रोफेसरों और एबीवीपी द्वारा कैंपस में हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा था।"

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ने बताया, "छात्रों के ऊपर इस्तेमाल की गई हर लोहे की रॉड का जवाब चर्चा और बहस से दिया जाएगा। जेएनयू की संस्कृति कभी भी नहीं मिटेगी। जेएनयू अपनी लोकतांत्रिक संस्कृति को बनाए रखेगा।"

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गौरतलब है कि रविवार शाम को जेएनयू के भीतर कुछ नकाबपोश लोग घुस गए थे और उन्होंने छात्रों और कुछ प्रोफेसरों पर लाठी-डंडों-रॉड से हमला कर दिया था। इस हमले में जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) अध्यक्ष ऐशे घोष समेत 30 से ज्यादा छात्र-छात्राएं घायल हो गए थे और उन्हें इलाज के लिए एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।

इस घटना के बाद जेएनयू प्रशासन और तमाम राजनेताओं ने छात्रों पर हुए इस हमले की निंदा की थी और पुलिस से घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

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सभी घायल छात्र किए गए डिस्चार्ज

जेएनयू हिंसा में रविवार शाम को घायल हुए 34 छात्रों को जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया था। सोमवार को इन सभी छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

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