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Kargil Vijay Diwas 2017: गेम चेंजर साबित हुर्इ थी विवादित बोफोर्स, तबाह कर दिए थे दुश्मन के ठिकाने

Kargil vijay diwas 2017, सन् 1999  में जम्मू-कश्मीर में करगिल जिले में भारत - पाकिस्तान में बीच कारगिल युद्ध हुआ

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Yuvraj Singh Jadon

Jul 24, 2017

Kargil Vijay Diwas, Kargil War Conflict events

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जयपुर
। सन् 1999 में जम्मू-कश्मीर में करगिल जिले में भारत आैर पाकिस्तान में बीच कारगिल युद्ध हुआ। इस युद्ध में भारतीय सेनाअों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों आैर सेना को मुंहतोड जवाब देते हुए भारत की सीमाआें से बाहर खदेड दिया था। करीब दो माह चले इस युद्ध में भारतीय सेना ने 26 जुलार्इ 1999 के दिन जीत हासिल की। तब से लेकर 26 जुलार्इ को
कारगिल विजय दिवस
के रूप में मनाया जाता है। कारगिल युद्ध में जहां भारतीय सेनाआें ने अपनी जंबाजी का लोहा मनवाया वहीं इस युद्ध में काम में ली गर्इ बोफोर्स तोप ने भारत को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।





























काउंटर अटैक में काम आर्इ बोफोर्स

करगिल की लड़ाई में भारतीय सेना ने 12-13 जून 1999 को पाकिस्तानी घुसपैठियों से टोलोलिंग की पहाड़ी को मुक्त कराया। बता दें कि इसी प्वाइंट से पाकी घुसपैठिए भारतीय पोस्ट्स के साथ एनएच 1 पर हमला कर रहे थे। इस वजह से वॉर सप्लाई में बाधा आ रही थी। भारतीय जवान यहां घुसपैठियों से कमजोर साबित हो रहे थे। अंत में यहां बोफोर्स के जरिए सेना ने काउंटर अटैक किया और पहाड़ों में छिपकर बैठे घुसपैठियों को मार भगाया।


गेम चेंजर साबित हुर्इ बोफोर्स

करगिल की लड़ाई में बोफोर्स तोप गेम चेंजर साबित हुआ था। बोफोर्स की लगभग 24 किलोमीटर की मारक क्षमता है। तोप की मारक क्षमता अपग्रेड की गई है। इसे टारगेट के हिसाब से सेट किया जा सकता है। विवादित सौदेबाजी में खरीदे गए इन तोपों का 1999 की लड़ाई में पहली बार इस्तेमाल किया गया था। करगिल वॉर के समय भारत के पास बहुत सीमित मात्रा में इसके गोले थे। बोफोर्स अब ऊंचे पहाड़ों पर सेना की मुख्य ताकत है।


















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बोफोर्स तोप की खूबियां

- बोफोर्स तोप की गिनती दुनिया के सबसे घातक तोपों में होती है।बोफोर्स तोपें 27 किलोमीटर की दूरी तक गोले दाग सकती हैं।


- हल्के वजन के कारण इसे युद्धभूमि में कही भी तैनात करना और यहां-वहां ले जाना आसान होता है। 155 MM लंबी बैरल वाली यह तोप एक मिनट में 10 गोले दागने की ताकत रखती है।


- तोप की सबसे बड़ी खासियत इसे -3 डिग्री से लेकर 70 डिग्री के ऊंचे कोण तक फायर करने की है। इस खासियत से यह तोप पहाड़ी इलाकों में बहुत उपयोगी साबित होता है।






- बोफोर्स में 68 हार्सपॉवर के दो इंजन होते हैं, प्रत्येक की फ्यूल कैपिसिटी 22 लीटर है।

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- इससे रात में भी टारगेट डेस्ट्रॉय किया जा सकता है। पहाड़ों में दुश्मन से लड़ने के लिए ये बेहतरीन हथियार है।


- लोकेशन पता चलने पर इससे निशाना साधा जा सकता है।








- इस तोप की खरीदी से जुड़े विवादों के बाद सरकार ने तोप बनाने वाली कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया था। इस वजह से काफी वक्त तक गोले और अन्य सामानों की आपूर्ति नहीं की गई। लेकिन अब सरकार ने बोफोर्स को कालीसूची से हटाकर इनके रखरखाव आदि के लिए ध्यान दे रही है।


- डीआरडीओ ने बोफोर्स तोप के मूल डिजाइन में कई सुधार किए हैं।


- अपग्रेड मॉडल में मारक क्षमता 27 किलोमीटर से बढ़ाकर 38 किलोमीटर कर दी गई।


- तोप में एक परफारमेंस मॉनिटरिंग सिस्टम, गनर साइड का डिस्प्ले भी जोड़ा गया है।


- तोप के आरंभिक परीक्षण हुए हैं।











कारगिल की लड़ाई में बना था रिकॉर्ड

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध में तोपखाने (आर्टिलरी) से 2,50,000 गोले और रॉकेट दागे गए थे। 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने रोज करीब 5,000 बम फायर किए थे। लड़ाई के महत्वपूर्ण दिनों में प्रतिदिन हर आर्टिलरी बैटरी से औसतन एक मिनट में एक राउंड फायर किया गया था।
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