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महाराष्ट्र: स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से अबतक 302 लोगों की मौत, 325 अस्पताल में भर्ती

महाराष्ट्र स्वाइन फ्लू की चपेट में हैं। इस साल राज्य में स्वाइन फ्लू से 302 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

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Swine flue

महाराष्ट्र: स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से इस साल अबतक 302 लोगों की मौत, 325 अस्पताल में भर्ती

मुंबई। स्वाइन फ्लू का कहर बरकरार है। महाराष्ट्र इस वक्त स्वाइन फ्लू और इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) की गंभीर बीमारी की चपेट में हैं, जिस कारण इस वर्ष तीन सौ से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। जबकि 325 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। राज्य के एक सर्विलांस अधिकारी ने जानकारी देेते हुए बताया कि राज्य में स्वाइन फ्लू के कारण अब तक 302 लोगों की मौत हो चुकी है। आगे उन्होंने कहा कि 325 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। स्वाइन फ्लू के 22-23 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। साथ ही उन्होंने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि अगर फ्लू जैसे कोई लक्ष्ण दिखाई दें तो फौरन डॉक्टर के पास जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

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नासिक में हुईं सबसे ज्यादा मौतें

H1N1 वायरस से फैलने वाले इस रोग की वजह से नासिक में अधिक मौतें हुई हैं। वैसे ज्यादातर मामले पिछले दो महीने में सामने आए हैं। हाल ही की राज्य स्वास्थ्य रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि नासिक में सबसे ज्यादा 76 मौतें हुई जबकि पुणे सिटी में 64, पिंपरी छिंछवाड़ में 33, सतारा में 28 और कोल्हापुर में 17 लोगों की जान जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दो माह में ज्यादा वर्षा होने के कारण स्वाइन फ्लू के मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है।

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स्वाइन फ्लू क्या है?
स्वाइन फ्लू इस सदी की सबसे भयानक वायरल बीमारी बन चुकी है। स्वाइन फ्लू को H1N1 नाम से भी जाना जाता है। सूअरों की वजह से यह बीमारी होती है। यह आमतौर पर स्वाइन इन्फ्लूएंजा ए वायरस के H1N1 स्ट्रेंस की वजह से होता है। हालांकि H1N2, H3N1 और H3N2 के रूप में अन्य स्ट्रेंस भी सूअरों में मौजूद रहते हैं। हालांकि लोगों में स्वाइन फ्लू होना सामान्य नहीं है, मानवीय संक्रमण कभी-कभी होते हैं, मुख्यतया संक्रमित सूअरों के साथ निकट संपर्क आने के बाद ।

क्यों होता है स्वाइन फ्लू ?
स्वाइन फ्लू H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस से होता है और यह बीमारी बहुत ही संक्रामक होती है। यह वायरस स्वाइन फ्लू से जूझ रहे मरीजों के खांसने या फिर छींकने के दौरान मुंह और नाक से निकली छोटी बूंदो के साथ बाहर आ जाते हैं और ये हवा में करीब 24 घंटों तक रहते हैं। जो भी व्यक्ति इस हवा में सांस लेता है तो वायरस उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके साथ ही अगर कोई व्यक्ति इस वायरस युक्त बूंदों से संक्रमित दरवाजे का हैंडल, ग्लास, तकिया, तौलिया या फिर कोई अन्य वस्तु को छूता है और छूने के बाद इन्हीं संक्रमित हाथों को अपने मुंह या नाक के पास रखता है तो वह व्यक्ति भी इस वायरस से संक्रमित हो सकता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू बहुत ही गंभीर बीमारी है। अगर शुरुआत में ही इसके लक्षण से इसका पता लगा लिया जाए तो इस बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता है। निम्नलिखित इसके लक्ष्ण होते हैं।
1. भूक न लगना
2. खांसी
3. बुखार
4. नाक से पानी बहना या नाक जाम हो जाना
5. सिरदर्द
6. कमजोरी या थकान
7. बदनदर्द, उलटी
8. मांसपेशियों में खिचाव
9. ठंडा लगना