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केरल में धारा-377 के खिलाफ होते हैं सबसे ज्यादा अपराध, रिपोर्ट में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे

रिपोर्ट में समलैंगिक संबंध मामलों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

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Shweta Singh

Sep 07, 2018

maximum crime cases related to section 377 from kerala says report

केरल में धारा-377 के खिलाफ होते हैं सबसे ज्यादा अपराध, रिपोर्ट में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे

कोच्चि। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में आईपीसी की धारा-377 को आशिंक रूप से खारिज कर दिया है। इस धारा को कोर्ट ने समानता और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करार देते हुए ये फैसला सुनाया है। यानी अब बालिग समलैंगिक जोड़ों के बीच आपसी सहमति से संबंध कानूनी रूप से अपराध नहीं है। इस फैसले पर एक समाज का एक हिस्सा जहां बेहद खुश है, वहीं कुछ ने इसके खिलाफ टिप्पणियां की हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको इस मामले से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य हैं, जो शायद कम लोगों को पता हो।

धारा 377 के सबसे ज्यादा मामले यूपी से

आपको जानकर हैरान रह जाएंगे कि भारत में केरल दूसरा राज्य है जहां धारा 377 के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट में वर्ष 2016 के नैशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो आंकड़ों पर गौर किया जाए तो केरल में धारा 377 के खिलाफ 207 मुकदमे दर्ज हुए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में इस मामले में 999 केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा देश के दक्षिण राज्यों से सामने आए ऐसे मामलों की बात करें तो कर्नाटक से 8, आंध्र प्रदेश के 7 और तेलंगाना से 11 मामले दर्ज हुए थे। इसके अलावा तमिलनाडु की बात करें तो वहां इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया।

इससे संबंधित अपराधों में भी केरल सबसे आगे

रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि धारा-377 के संबंध में होने वाले अपराध के आंकड़े भी देश में सर्वाधिक हैं। केरल का क्राइम रेट 0.6 फीसदी है जो उत्तर प्रदेश में 0.5 प्रतिशत है। इसके अलावा केंद्र शासित राज्यों की बात करें तो दिल्ली में ये दर 0.8 फीसदी है।

इतने अधिक केस दर्ज होने के पीछे कई कारण

इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि केरल प्रदेश में इतने अधिक केस दर्ज होने के पीछे कई कारण हैं। इनमें से एक कारण है केरल के कई इलाकों में गे सेक्स का सामान्य होना। अधिकारियों ने ये भी बताया कि यहां के रुपये लेकर सेक्स करने के भी कई मामले सामने आते हैं, जिनके बारे में पता चलते ही लोग रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं। उनका कहना है कि नाबालिगों के साथ भी जबरन अप्राकृतिक गे सेक्स पॉक्सो ऐक्ट साथ-साथ धारा-377 में दर्ज होता है।

फैसले के बाद बढ़ेंगी मुश्किलें

अधिकारियों का मानना है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आने वाले दिनों में समस्या बढ़ सकती है। उनका कहना है कि अब रेप साबित करना भी एक चुनौती है।


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