
सिख फॉर जस्टिस संगठन पर भारत ने लगाया प्रतिबंध, अलगाववादी एजेंडे को देता था बढ़ावा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सिखों के लिए अलग देश की मांग करने वाले अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया है। pro-Khalistan संगठन sikhs for justice को गैर कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम 1967 की धारा 3 (1) के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंध किया गया है।
सिख समुदाय से सरकार ने की थी बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इस बारे में सिख समुदाय की सभी प्रमुख संस्थाओं और संगठनों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ये फैसला लिया है।
अलगाववाद को बढ़ावा देता SFJ
खालिस्तान समर्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन अलगाववाद एजेंडे को बढ़ावा देता है। इसे अमरीका, कनाड़ा और ब्रिटेन से कुछ चरमपंथी विदेशी सिख नागरिकों द्वारा चलाया जाता है। इस संगठन ने रेफरेंडम 20-20 के जरिए पाकिस्तान से मदद मांगी थी।
पंजाब सरकार ने फैसले को सराहा
सिख फॉर जस्टिस को बैन किए जाने के फैसले का पंजाब सरकार ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि एसएफजे को गैरकानूनी करार देना एक अच्छी बात है। दरअसल, सिख फॉर जस्टिस संगठन अवैध तरीके से पंजाब में भी अपनी गतिविधियां चला रहा थे, जिसकी वजह से राज्य में हालात बिगड़ते रहे हैं।
पाकिस्तान में भी लग चुका है बैन
केंद्र की मोदी सरकार के अनुरोध पर पाकिस्तान ने भी इसी साल 15 अप्रैल को इस संगठन पर बैन लगा लगाया है। गुरपतवंत सिंह पन्नू और परमजीत सिंह इस संगठन के प्रमुख हैं। ये न्यूयॉर्क में रहकर इस संगठन को चलाते हैं।
खालिस्तान को मजबूत करना चाहता था सिख फॉर जस्टिस
बता दें कि सिख फॉर जस्टिस एक ऑनलाइन कैंपेन चला रहा था। जो रेफरेंडम 20-20 पर काम कर रहा था। ये लोग खालिस्तान को एकबार फिर मजबूत करने की नियत से पंजाब में माहौल खराब करने की फिराक में रहते थे।
Updated on:
10 Jul 2019 10:14 pm
Published on:
10 Jul 2019 07:02 pm
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