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‘कश्मीर की आवाज’ थे शुजात बुखारी, पहले भी मिली थीं धमकियां

गुरुवार शाम करीब साढ़े सात बजे बुखारी को उस समय गोली मार दी गई जब वे लाल चौक स्थित प्रेस एन्क्लेव के अपने ऑफिस से इफ्तार पार्टी के लिए निकल रहे थे।

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sujaat Bukhari

'कश्मीर की आवाज' थे शुजात बुखारी, पहले भी मिली थीं धमकियां

श्रीनगर। श्रीनगर में कल शाम आतंकियों की गोलियों से मारे गए राइजिंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी की हत्या के बाद कश्मीर के साथ-साथ पूरे देश में हड़कंप मच गया है। गुरुवार शाम करीब साढ़े सात बजे बुखारी को उस समय गोली मार दी गई जब वे लाल चौक स्थित प्रेस एन्क्लेव के अपने ऑफिस से इफ्तार पार्टी के लिए निकल रहे थे। बताया जा रहा है कि मोटरसाइकिल सवार चार आतंकियों ने उन्हें घेरकर बेहद करीब से गोली मार दी।

एक्स कैटेगरी की मिली थी सुरक्षा

शुजात बुखारी को कई बार आतंकियों से पहले भी धमकियां मिल चुकीं थीं। एक साल पहले ही पाकिस्तानी आतंकियों से उन्हें धमकी मिली थी। जिसके बाद ही उन्हें एक्स कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी। बुखारी पर हुए हमले में एक पुलिसकर्मी तथा एक आम नागरिक घायल हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि हमले में घायल दोनों लोगों की हालत गंभीर है। पुलिस ने यह भी बताया कि इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे, जिनमें से एक की मृत्यु हो गयी है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि हमलावरों की संख्या कितनी थी।

कश्मीर की निर्भीक आवाज थे शुजात

शुजात बुखारी जम्मू-कश्मीर के जाने-माने पत्रकार थे। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन के प्रारम्भ से ही कश्मीर के हर मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई। शुजात ने राजनेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ भी आवाज उठा चुके हैं। भारत के बाहर कई देशों में जाकर वो कश्मीरी जनता के दुःख दर्द की बात करते रहे हैं। उन्होंने हमेशा कश्मीर में न्याय और शांति की वकालत की है। 90 के दशक में वे 'द हिन्दू 'नामक पत्र से अपने करियर की शुरुआत करने वाले शुजात बुखारी वर्तमान में इस राइजिंग कश्मीर नामक पत्र में एडिटर थे। राइजिंग कश्मीर के संपादन के दौरान शुजात बुखारी ने कश्मीर में हिंसा का जमकर विरोध किया था। वह 'अदबी मरकज' नामक संगठन के अध्यक्ष भी थे जो कश्मीर घाटी में सबसे बड़ा साहित्यिक सांस्कृतिक संगठन माना जाता है।

अंतिम ट्वीट में यूएन की रिपोर्ट का समर्थन किया था

गुरुवार को कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन पर आई संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के समर्थन में उन्होंने आखिरी ट्वीट किया था। रिपोर्ट का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर में जमीनी हकीकत कहीं अधिक गंभीर है।