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सिंधी आध्यात्मिक गुरु दादा वासवानी का 99 साल की उम्र में निधन

सिंधी समुदाय के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक, समाज सेवी साधु जेपी वासवानी की 99 साल की उम्र में मृत्यु हो गई।

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Sindhi spiritual guru

सिंधी आध्यात्मिक गुरु दादा वासवानी का 99 साल की उम्र में निधन

नई दिल्ली। सिंधी समुदाय के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक, समाज सेवी साधु जेपी वासवानी का 99 साल की उम्र में गुरुवार को निधन हो गया। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार दादा वासवानी जी का गुरुवार को सुबह 9 बजे निधन हुआ। वहीं, अब उनका पार्थिव शरीर उनके आश्रम 'साधु वासवानी मिशन' में भक्तों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। बता दें कि कई दिनों से बीमार चल रहे आध्यात्मिक गुरु को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्हें बुधवार को छुट्टी दी गई थी।

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जेपी वासवानी आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ दार्शनिक और समाज सेवी साधु भी थे। वासवानी का 2 अगस्त को 100वां जन्म दिन था। उनके जन्म दिने को लेकर बड़ी योजनाएं बन रही थीं, जिसमें दुनिया भर के उनके भक्तों के भाग लेने की उम्मीद थी।

कौन थे जेपी वासवानी?

आध्यात्मिक गुरु के नाम से प्रसिद्घ वासमानी का जन्म 2 अगस्त 1918 को हैदराबाद एक सिंधी दंपति के घर हुआ था। वह अपने माता-पिता की सात संतानों में एक थे। उन्होंने साधु वासवानी मिशन का नेतृत्व किया। इसकी स्थापना उनके चाचा व आध्यात्मिक गुरु दिवंगत साधु टीएल वासवानी ने हैदराबाद (सिंध, पाकिस्तान) में 1929 में की थी। इसकी शाखाएं अब दुनिया भर में हैं। उनके निधन के बाद, साधु जेपी वासवानी उनके उत्तराधिकारी बने और उन्होंने गुरु मिशन की विरासत को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाया।

बता दें कि वह विश्व शांति, शाकाहार, लड़कियों की शिक्षा, गरीबों के प्रति करुणा के समर्थक थे। साधु वासवानी ने लंदन में ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स, ऑक्सफोर्ड में आध्यात्मिक नेताओं के वैश्विक फोरम, शिकागो में विश्व धर्म संसद, संयुक्त राष्ट्र में धार्मिक व आध्यात्मिक नेताओं के मिलेनियम विश्व शांति शिखर सम्मेलन व दक्षिण अफ्रीका में विश्व धर्म की संसद को संबोधित किया था।

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वासमानी ने पहली बार वैश्विक शांति की पहल, शांति का क्षण शुरू की, जिसमें 2 अगस्त को लोग सभी को क्षमा करने के लिए दो मिनट का मौन रखते हैं। इसमें दलाई लामा जैसे प्रसिद्ध व्यक्ति भाग लेते रहे हैं। साधु वासवानी को विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं, जिनमें 'यू थांट पीस अवॉर्ड 1998' पोप जॉन पाल द्वितीय के साथ संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ था।