कोरोना वायरस से लड़ाई में अब सिंगल डोज वाली वैक्सीन आ गई है। रूस की Sputnik Light Vaccine को जल्द भारत में उत्पादन की मंजूरी मिल जाएगी, जिससे टीकाकरण अभियान को तेज किया जा सकेगा।
नई दिल्ली। रूस की कोविड-19 वैक्सीन Sputnik V के नए सिंगल शॉट वर्जन Sputnik Light के डेवलपर्स ने गुरुवार को कहा कि भारत उन देशों में शामिल होगा जहां आने वाले महीनों में इसका उत्पादन किया जाएगा। रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय और गैमलेया नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और वैक्सीन के डेवलपर्स रसियन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) ने बुधवार को घोषणा की थी कि Sputnik Light को रूस में इस्तेमाल के लिए अनुमति मिल गई है।
वैक्सीन के डेवलपर्स ने एक बयान में कहा कि 28 दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच रूस के सामूहिक टीकाकरण कार्यक्रम के हिस्से के रूप में वैक्सीन दिए जाने के 28 दिनों बाद एकत्र किए गए आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, Sputnik Light ने 79.4 फीसदी प्रभावकारिता का प्रदर्शन किया। गैमलेया केंद्र ने प्रयोगशाला परीक्षणों के दौरान यह भी बताया कि Sputnik Light कोरोना वायरस के सभी नए स्ट्रेन के खिलाफ भी प्रभावी साबित हुई थी।
Sputnik Light की सुरक्षा और इम्यूनोजेनेसिटी स्टडी के चरण I और II ने प्रदर्शित किया था कि यह टीकाकरण के बाद 28वें दिन 96.9 फीसदी व्यक्तियों में एंटीजेन स्पेशिफिक IgG एंटीबॉडी के विकास को प्रभावित कर सकती है, और यह टीकाकरण के बाद 28वें दिन 91.67 फीसदी व्यक्तियों में एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने वाले वायरस के विकास को प्रभावित करती है।
बयान में कहा गया कि Sputnik Light के टीकाकरण के बाद कोई गंभीर प्रतिकूल घटना दर्ज नहीं की गई। टीकाकरण की तारीख से 28वें दिन तक वैक्सीन पाने वाले लोगों में संक्रमण दर 0.277 फीसदी थी। जबकि इसी अवधि में अस्वस्थ वयस्कों में संक्रमण की दर 1.349 फीसदी थी।
रूस, यूएई और घाना सहित कई देशों में 7,000 लोगों को शामिल करने वाले तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल का आयोजन किया गया था और मई में इसके अंतरिम परिणाम आने की उम्मीद है।
आरडीआईएफ के सीईओ किरिल दिमित्रिव ने बताया कि Sputnik Light "तेजी से वायरस फैलने वाले कई देशों के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान" हो सकता है क्योंकि इसके परिणामस्वरूप "गंभीर संक्रमणों के खिलाफ 100 फीसदी सुरक्षा" मिली थी।
उन्होंने कहा, "Sputnik V कोर वैक्सीन होगी जबकि Sputnik Light सस्ती और ज्यादा वाजिब होगी, और यह सुनिश्चित करेगी कि अधिक लोगों को जल्दी से टीका लगाया जा सके। Sputnik Light को अगले सप्ताह तक कई देशों में पंजीकृत किया जाएगा और हम कई देशों के नियामकों के साथ बातचीत कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि जिन 64 देशों ने Sputnik V को पंजीकृत किया है, वे Sputnik Light को भी पंजीकृत करेंगे।
दिमित्रिव ने भारत, दक्षिण कोरिया और चीन का नाम उन देशों में रखा है जो Sputnik Light का उत्पादन करेंगे। उन्होंने बताया, "हमने 10 देशों में 20 से अधिक उत्पादकों के साथ भागीदारी की है और वे वैक्सीन के दोनों संस्करण बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि Sputnik Light कोरोना वायरस के सभी मौजूदा म्यूटेशन के साथ अच्छी तरह से काम करती है क्योंकि "इसके कोड में सभी म्यूटेशन शामिल हैं"। Sputnik Light को अन्य टीकों के लिए बूस्टर शॉट के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है और वर्तमान में एस्ट्राजेनेका के साथ परीक्षण चल रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा, "Sputnik Light अन्य टीकों के साथ अधिक बूस्टर शॉट देता है। हम एस्ट्राज़ेनेका के साथ परीक्षण कर रहे हैं लेकिन इसका उपयोग दूसरों के साथ भी किया जा सकता है। अतिरिक्त परीक्षण के अधीन सभी म्यूटेशन के लिए अन्य टीकों को अपग्रेड करने के लिए यह एक बूस्टर शॉट हो सकता है।"
उन्होंने बताया, "राजनीति के बावजूद, सभी देशों को वायरस से लड़ने के लिए एक साथ आना चाहिए। अब यह म्यूटेशन और टीकों के बीच की लड़ाई है।"
बयान में कहा गया है कि विश्व स्तर पर Sputnik Light की लागत 10 अमरीकी डॉलर (करीब 750 रुपये) से कम होगी और +2 से +8 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ स्टोरेज के लिए भी इसकी आसान जरूरतें हैं, जो आसान लॉजिस्टिक्स प्रदान करती हैं।
भारत के ड्रग कंट्रोलर द्वारा आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी हासिल कर चुकी Sputnik V के डेवलपर्स दी ने एक साल में 85 करोड़ से से ज्यादा खुराक निर्मित करने के लिए डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, ग्लैंड फार्मा, हेटेरो बायोफार्मा, पैनेसिया बायोटेक, स्टेलिस बायोफार्मा और विरचो बायोटेक जैसी भारतीय दवा कंपनियों के साथ गठजोड़ किया है।