सुप्रीम कोर्ट ने BJP-Congress समेत 10 पार्टियों पर लगाया 5 लाख रुपये तक का जुर्माना, जानिए पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा-कांग्रेस समेत दस राजनीतिक दलों पर बिहार विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवारों के आपराधिक केसों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं करने के मामले में पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया है।

नई दिल्ली। राजनीति से आपराधिक छवि वाले नेताओं को हटाने और साफ-सुथरी छवि के साथ-साथ इमानदार नेताओं को लाने की बात सभी दलों की ओर से की जाती है। लेकिन जब चुनाव में टिकट देने की बारी आती है तो एक-दूसरे को पछाड़ते हुए आपराधिक व्यक्ति को टिकट देने के मामले में आगे निकल जाते हैं।

देश के कई लोकसभा और विधानसभा सीटों पर दबंग व्यक्ति या फिर आपराधिक छवि के नेताओं का दबदबा है। ऐसे में वे जीतकर सदन तक पहुंच जाते हैं। अब देश की सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए भाजपा-कांग्रेस समेत दस राजनीतिक दलों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया है। दरअसल, भाजपा-कांग्रेस समेत दस राजनीतिक दलों पर बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अपने उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाया है।

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बिहार विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवारों का आपराधिक इतिहास सार्वजनिक नहीं करने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 10 पार्टियों को अवमानना का दोषी माना। जिन 10 पार्टियों पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया है उनमें जेडीयू, आरजेडी, एलजेपी, आरएलएसपी, कांग्रेस, बीएसपी, सीपीआई, भाजपा, सीपीएम और एनसीपी शामिल है। इनमें से जेडीयू, आरजेडी, एलजेपी, कांग्रेस, बीएसपी, सीपीआई पर एक-एक लाख रुपये और बाकी पर 5-5 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करना जरूरी

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतदान होने से पहले उम्मीदवारों की अपराधिक पृष्टभूमि सार्वजनिक करने निर्देश दिए। ये आदेश लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के लिए लागू होंगे। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि इसके लिए एक मोबाइल एप बनाया जाए, जिसमें चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों के आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी होगी। उसमें सभी उम्मीदवारों के बारे में जानकारी होगी कि उनके खिलाफ कितने अपराधिक मामले दर्ज हैं और किस तरह के अपराध का मुकदमा है.. साथ ही वर्तमान में उस मुकदमें की स्थिति क्या है।

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इसके अलावा कोर्ट ने चुनाव आयोग से एक अलग विभाग बनाने को भी कहा है। इस विभाग का काम आम लोगों की शिकायतों को सुनना और तय समय में निपटारा करना होगा। यदि कोई उम्मीदवार अपनी जानकारी छिपाता है तो इस विभाग में उसकी शिकायत दर्ज होगी।

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव सुधार को लेकर फरवरी 2020 में एक आदेश दिया था। इस आदेश में भी यह कहा गया था कि सभी राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों की जानकारी नामांकन से दो हफ्ते पहले दें। लेकिन अब कोर्ट ने उस आदेश में थोड़ा संशोधन किया है और कहा है कि अब उम्मीदवार के चयन के 48 घंटे के भीतर राजनीतिक दलों को नेताओं की पृष्ठभूमि की जानकारी अपने वेबसाइट पर देनी होगी। इसके बाद नागरिक ये तय करेंगे कि उन्हें वोट देना है या नहीं।

Anil Kumar
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