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मॉब लिंचिंगः सुप्रीम कोर्ट ने दिया था बड़ा आदेश, सुस्त सरकारों ने नहीं बताई ये अहम बात

मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के उदेश्य से सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ही केंद्र और राज्य सरकारों को बड़ा आदेश दिया था।
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Chandra Prakash Chourasia

Sep 07, 2018

supreme court

मॉब लिंचिंगः सुप्रीम कोर्ट ने दिया था बड़ा आदेश, सुस्त सरकारों ने नहीं बताई ये अहम बात

नई दिल्ली: मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। शुक्रवार को कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से रेडियो, टेलीविजन और अन्य मीडिया मंचों पर मॉब लिंचिंग से संबंधित उसके दिशानिर्देशों का व्यापक प्रचार करने को कहा। अदालत ने अपने दिशानिर्देश में बताया था कि किसी भी प्रकार की भीड़ की हिंसा में संलिप्त होने पर कानून के अंतर्गत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कोर्ट ने इससे पहले भी सरकारों को ये निर्देश दिया था लेकिन सरकारों ने सुस्ती दिखाई और इतने गंभीर मुद्दे को भी नजरअंदाज कर दिया।

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सरकारें करें मॉब लिंचिंग के परिणामों का प्रचार

शीर्ष अदालत ने 17 जुलाई को अपने आदेश में केंद्र और राज्य सरकारों को रेडियो, टीवी, गृह विभाग व राज्य पुलिस की वेबसाइटों पर यह प्रसारित करने का आदेश दिया था कि भीड़ की हिंसा व लिंचिंग में शामिल होने पर कानून के अंतर्गत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल ने अदालत को सूचित किया कि मंत्रियों का एक समूह(जीओएम) गौरक्षक समूहों द्वारा पीट-पीट कर मार डालने की घटना से निपटने के लिए कानून की प्रकृति पर विचार कर रहा है, जिसके बाद प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्र व राज्य सरकारों से उसके 17 अगस्त के आदेश को पालन करने को कहा।

सरकारें नहीं मान रहीं सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश

अदालत ने यह आदेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह द्वारा अदालत को यह बताने के बाद दिया कि केवल नौ राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों ने इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट पेश किया है। इसके अलावा, अदालत ने रकबर खान की हत्या के संबंध में भी राजस्थान सरकार से रिपोर्ट की मांग की। रकबर खान की गौरक्षकों ने 24 जुलाई को राजस्थान के रामगढ़ जिले के लालवंडी गांव में पिटाई कर दी थी, जिसके बाद उसकी अस्पताल में मौत हो गई थी। राजस्थान ने गुरुवार को अदालत को सूचित किया था कि मामले से संबंधित एसएचओ को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा राज्य ने बताया कि तीन कांस्टेबल को पुलिस लाइन स्थांतरित कर दिया गया है।