उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का अमरीका में निधन, 3 दिन का राजकीय शोक घोषित

उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का अमरीका में निधन, 3 दिन का राजकीय शोक घोषित

  • कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे प्रकाश पंत
  • फरवरी महीने में किया था भाजपा सरकार का बजट पेश
  • पीएम मोदी ने जताया दुख

नई दिल्ली। नई दिल्ली। उत्तराखंड के वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रकाश पंत का निधन हो गया है। उन्होंने अमरीका के हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। प्रकाश पंत कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। वहीं, उनकी मौत से पार्टी और उत्तराखंड सरकार में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है।

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Prakash Pant

फेफड़ों में कैसर से पीड़ित थे पंत

जानकारी के मुताबिक, प्रकाश पंत लंबे समय से फेफड़ों में कैंसर से पीड़ित थे। उनका दिल्ली में काफी समय से इलाज चल रहा था। लेकिन, पिछले दिनों उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें अमेरिका ले जाया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें जवाब दे दिया और बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

प्रकाश पंत के मौत की खबर मिलते ही राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ पड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तक ने उनकी मौत पर दुख प्रकट किया। पीएम ने ट्वीट में कहा कि उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत के संगठनात्मक कौशल ने भाजपा को मजबूत बनाने में मदद की और उनके प्रशासनिक कौशल ने उत्तराखंड की प्रगति में योगदान दिया।

उत्तराखंड सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रम रद्द करते हुए राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित कर दिया है। गुरुवार को राज्य के सभी सरकारी दफ्तर, स्कूल-कॉलेज बंद हैं।

 

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योगी ने जताया शोक
इधर, उत्तरप्रदेश के सीएम योगी आदित्यानाथ ने प्रकाश पंत के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने कहा कि प्रकाश पंत का जाना एक अपूर्णीय क्षति है, देश और उत्तराखंड ने एक अच्छा नेता खो दिया।

 

 

 

yogi and narendra modi

कुछ दिन पहले किया था बजट पेश

प्रकाश पंत ने कुछ दिनों पहले ही राज्य में भाजपा सरकार का बजट भी पेश किया था। बजट सत्र के दौरान अचानक भाषण देते हुए वो बेहोश होकर भी गिर गए थे। उनके पास वित्त, संसदीय, पेयजल एवं स्वछता, आबकारी, विधायी, भाषा, गन्ना विकास और चीनी उद्योग मंत्रालय थे।

जानकारी के मुताबिक, प्रकाश पंत मूल रूप से चोढियार (गंगोलीहाट) पिथौरागढ़ के रहने वाले थे। लेकिन बाद में वे खड़कोट (पिथौरागढ़) में बस गए थे।

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