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चारा घोटाला: लालू की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

बहुचर्चित चारा घोटाले के मामले में रांची की जेल में बंद हैं लालू प्रसाद यादव। चारा घोटाले के तीन अलग-अलग मामलों में लालू को मिली है सजा। बीते 10 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने सुनाया था फैसला।

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चारा घोटाला मामला- लालू प्रसाद यादव

चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली। देश के बहुचर्चित घोटालों में से एक चारा घोटाले से संबंधित तीन मामलों में जमानत के लिए दायर याचिका पर आज यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। झारखंड उच्च न्यायालय के 10 जनवरी के फैसले को चुनौती देने वाली लालू यादव की याचिकाओं पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी।

चारा घोटाला: लालू यादव को कितनी बार मिली सजा और कब-कब जाना पड़ा जेल?

बता दें कि इससे पहले इस मामले में सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने तीनों मामलों में लालू यादव को जमानत दी थी। जमानत के लिए दायर याचिका में लालू ने खराब सेहत का हवाला दिया था। चारा घोटाले से जुड़े अलग-अलग तीन मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से पहले ही सजा मिल चुकी है। अभी वह दिसंबर 2017 से रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद हैं।

चारा घोटाला: एक नजर में जानिए कब क्या हुआ?

क्या है चारा घोटाला?

आपको बता दें कि यह बहुचर्चित चारा घोटाला वर्ष 1996 में सामने आया था। दरअसल 1990 से 1994 के बीच फर्जी बिलों के सहारे देवघर कोषागार से 89 लाख 27 हजार रुपए, बांका और भागलपुर कोषागार से 46 लाख रुपए पशु चारे के नाम पर निकासी करने का मामला सामने आया।

इसके बाद से बिहार पुलिस ने 1994 में राज्य के गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्ज़ी बिलों के ज़रिए करोड़ों रुपए की कथित अवैध निकासी के मामले दर्ज किए। एक-दो करोड़ रुपए से शुरू हुआ यह घोटाला 900 करोड़ रुपए तक जा पहुंच गया और अभी कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घोटाला कितनी बड़ी रकम का किया गया है, क्योंकि यह वर्षों से होता रहा है और बिहार में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियां हुई हैं।

केस दर्ज होने के बाद इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्रा जैसे बड़े नाम भी शामिल थे। इन आरोपियों के खिलाफ सीबीआई (CBI) ने 27 अक्तूबर, 1997 को मुकदमा रजिस्टर किया था। अब तक इस मामले के 11 आरोपियों की मौत हो चुकी है।

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