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युद्धों से जूझते अफ्रीका और मध्यपूर्व, कैसे भरेंगे बेघर हुए 4 करोड़ लोगों के जख्म

मध्यपूर्व के देशों में सत्ता के संघर्ष की लड़ाई अभी भी जारी है। युद्ध के कारण दुनिया के लाखों लोगों को अपने घर से विस्थापित होने को विवश होना पड़ा है। करीब 4 करोड़ लोग दुनियाभर में विस्थापित जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

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विस्थापित लोग

युद्धों से जूझते अफ्रीका और मध्यपूर्व, कैसे भरेंगे बेघर हुए 4 करोड़ लोगों के जख्म

नई दिल्ली। पूरी दुनिया के देशों में शायद ही कोई ऐसा देश बचा है जहां पर गृह युद्ध या हिंसा जैसे हालात न बने हों और फिर सरकार के साथ विपक्ष या विद्रोही ताकतों का टकराव न हुआ है। सरकार और विपक्ष या विद्रोही ताकतों के बीच टकराव की स्थिति में सबसे ज्यादा यदि किसी को नुकसान झेलना पड़ता है तो वह है, वहां के आम नागरिक। ऐसे में लाखों लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आज दुनिया के आधे से अधिक भू-भाग में कहीं न कहीं सत्ता का संघर्ष हर दिन देखने को मिलता है और फिर आम नागरिकों को पलायन होने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इस तरह की सबसे गंभीर परिस्थिति अफ्रीकी देश और मध्यपूर्व में देखने को मिला है। अभी एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह बताया गया है कि ऐसी हिंसक घटनाओं के कारण करीब 4 करोड़ लोगों को अपने देश के भीतर ही विस्थापित होने के लिए विवश होना पड़ा है। यह संख्या अब तक सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया है। बता दें कि यह आंकड़ा आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र ( IDMC ) और नॉर्वेजियन शरणार्थी परिषद ( NRC ) की ओर से जारी किया गया है।

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क्या है कारण?

दरअसल, अफ्रीका और मध्यपूर्व के देशों में वर्षों से सत्ता के संघर्ष का दौर जारी है। इन देशों में राजशाही या फिर तानाशाही का शासन रहा है। तानाशाही या फिर राजशाही शासन के कार लोगों में आक्रोश भड़कता गया और फिर यह संघर्ष में बदल गया। इसके अलावे वैश्विक राजनीति के कारण कुछ देशों में आज भी संघर्ष जारी है। इसमें सीरिया , अफगानिस्तान, वेनेजुएला, इराक, क्यूबा, अल्जीरिया, लीबिया, इजिप्ट, तुर्की, सुड़ान, यमन आदि कई देश शामिल हैं। वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और विपक्ष के नेता जुआन गुइदो के बीच सत्ता का संघर्ष जारी है। ऐसे ही सीरिया में सरकार और आतंकी समूहों के बीच संघर्ष चल रहा है। लीबिया में सरकार और सेना के बीच संघर्ष जारी है। अल्जीरिया, सुड़ान आदि देशों में वर्षों तक सत्ता में रहने वाले नेताओं के खिलाफ संघर्ष चला। अब्देलअजीज बुटफ्लिका और उमर उल-बशीर जैसे नेताओं को सत्ता से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके अलावे दुनिया के बाकी अन्य देशों मसलन, म्यांमार, भारत , पाकिस्तान , बांग्लादेश, स्पेन, फ्रांस, इजरायल, फिलिस्तीन, चीन आदि देशों में भी आम नागिरकों को विस्थापित होना पड़ा है।

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इन देशों में सबसे अधिक हुए हैं विस्थापन

NRC के चीफ जन एगलैंड ने जेनेवा में बताया कि अत्यधिक हिंसा और आपदाओं का डर से लोगों को अपने घरों, जमीन, संपत्ति और समुदाय को छोड़कर जाने को विवश कर देता है। 2018 में दुनिया भर में 28 मिलियन लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। सीरिया, इथोपिया, नाइजीरिया , कांगो जैसे देशों में बीते साल सबसे अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। इन क्षेत्रों में 10.8 मिलियन नए ऐसे लोग हैं जो आंतरिक रूप से विस्थापित हैं। इसके अलावे रिपोर्ट में यह बताया गया है कि आतंरिक रूप से विस्थापित लोगों के अलावा 25 मिलियन ऐसे लोग हैं तो बॉर्डर पार कर दूसरे देशों में शर्णार्थी बनकर रह रहे हैं। सामुदायिक हिंसा और जमीन विवाद को लेकर इथोपिया में 2.9 मिलियन लोग विस्थापित हुए। तो वहीं बीते आठ साल मे सीरिया में 6.1 मिलियन नागिरक बेघर हुए हैं। प्राकृतिक आपदा के कारण पिछले साल 17.2 मिलियन लोग विस्थापित हुए थे। भारत, फिलीपींस, चीन में बाढ़, साइक्लोन के कारण 10 मिलियन लोग विस्थापित हुए हैं। अमरीका के कैलिफॉर्निया में बीते साल जंगलों में आग लगने के कारण सैंकड़ों, हजारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन लाखों लोगों के जख्मों को कैसे भरा जाएगा?

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