
अल मुंतर। निगरानी समूह सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार देश में विद्रोहियों के आखिरी बड़े गढ़ इदलिब में रूस ने शनिवार को एक महीने के भीतर दूसरी बार सबसे हिंसक हवाई हमले किए। सीरिया में संघर्ष को लेकर त्रिपक्षीय शिखर वार्ता के नाकाम होने के बाद ये हमले हुए। गौरतलब है कि सीरिया में बीते कई महीनों से विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष जारी है। सीरिया में इस रूस ज्यादा सक्रिय है। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के साथ मिलकर रूस विद्रोहियों का खात्मा कर रहा है। उसने आरोप लगाए है कि विद्रोहियों के पास ऐसे हथियार मौजूद हैं, जो दुनिया के लिए खतरा बन सकते हैं।
संघर्ष को रोकने के मुद्दे पर सहमति बने
सीरियाई सरकार सहयोगी देश रूस-ईरान और विद्रोहियों का समर्थन करने वाले तुर्की के नेताओं के बीच तेहरान में हुई शिखर वार्ता इदलिब में संघर्ष को रोकने के मुद्दे पर सहमति बनाने में नाकाम रही। शनिवार को दर्जनों रूसी लड़ाकू विमानों ने इदलिब के दक्षिणी एवं दक्षिणपूर्वी इलाकों में हवाई हमले किए। ब्रिटेन स्थित निगरानी समूह ने कहा कि हमले में कम से कम चार आम नागरिक मारे गए जिनमें दो बच्चे शामिल हैं। सीरिया में 2012 से लगातार सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है। इस दौरान कई बार रासायनिक हमले हुए जिसमें कइयों की जान गई। इन हमलों को रोकने के लिए अमरीका,जर्मनी,ब्रिटेन और रूस प्रमुखता से लड़ाई लड़ रहे हैं।
अप्रैल से बढ़ गया था तनाव
इस साल सात अप्रैल को सीरिया में हुए रासायनिक हमले के बाद अमरीका और रूस दोनों ही आक्रामक हो गए थे। इस बीच अमरीका और रूस में टकराहट भी सामने आई। एक तरफ अमरीका का कहना था कि सीरिया के राष्ट्रपति को हटाकर ही इस समस्या का हल निकाला जा सकता है। वहीं रूस का कहना था कि असद को हटाने की बजाय विद्रोहियों पर हमला किया जाए। अमरीका का मानना है कि इस समस्या की मुख्य वजह असद हैं। उन्हें हटाकर सीरिया में नई सरकार का गठन होना चाहिए। रूस ने इस दौरान असद सरकार का खुलकर समर्थन किया है।
Published on:
09 Sept 2018 10:01 am
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