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पांच सीटों पर लड़कर इमरान अपनी ही पार्टी के लिए बने मुसीबत

इमरान पांच सीटों पर एकसाथ चुनाव लड़े थे, नियमानुसार उन्हें अब चार सीटें छोड़नी होंगी
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Mohit Saxena

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Updated: 30 Jul 2018, 1:16 PM IST

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पांच सीटों पर लड़कर इमरान अपनी ही पार्टी के लिए बने मुसीबत

इस्लामाबाद। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आई है। इमरान की पार्टी ने 115 सीटों पर जीत हासिल की है और उसे बहुमत साबित करने के लिए करीब 137 सीटों तक पहुंचना है। इसके लिए उसे अन्य दलों से गठबंधन की आवश्यकता होगी। मगर खुद इमरान इस बार पांच सीटों से लड़े थे और सभी पर जीत हासिल की थी। नियमानुसार ऐसे में उन्हें चार सीटों को छोड़ना पड़ेगा। यह पार्टी के बड़ी मुसीबत बन सकता है। दरअसल इमरान की पार्टी को निदर्लीय उम्मीदवार ही समर्थन देने की सोच रहे हैं। इनके पास कुल 33 सीटे हैं।

सभी को मनाना होगा मुश्किल

गौरतलब है कि आम चुनाव में इमारान के लिए निर्दलीय उम्मीदवार का साथ पाना काफी मुश्किल होगा। उनके लिए एक—एक सीट काफी अहमियत रखेगी। विपक्षी पार्टियां निर्दलीय उम्मीदवारों को रोकने का प्रयास करेंगी। ऐसे में इमरान की चार सीटें बेकार होना पार्टी को खल रहा है। इमरान की वजह से चार सीटें पार्टी का गणित बिगाड़ सकती है। यह विपक्ष के लिए सुनहरा मौका बन सकता है। विपक्ष एकजुट होकर अपनी सरकार भी बनाने की कोशिश करेगा। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ फिलहाल खुद को मुसीबत से निकालने के लिए छोटी-छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन पाने के लिए जुटी हुई है ताकि जादुई आंकड़े तक पहुंच सके और इमरान खान पीएम बनें। मगर पार्टी की स्थिति कमजोर करने में इमरान खुद भी जिम्मेदार हैं।

पार्टियों से गठबंधन करना होगा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीटीआइ को अपनी सरकार बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। इसके लिए उसे विभिन्न पार्टियों से गठबंधन करना होगा। उसे पार्टियों को जोड़ने के लिए प्रलोभन देने होंगे। निर्दलीय को मनाने के लिए उन्हें शायद पदों का लालच भी देना होगा। अगर इमरान की पार्टी गठबंधन बनाकर सरकार बना भी लेती तो इसके गिरने का भी डर बना रहेगा। इमरान को इस समय अफसोस होगा कि वह पांच सीटों पर क्यों लड़े।