2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कश्मीर पर यूएन रिपोर्ट: भारत ने दर्ज किया विरोध, कहा- यह आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसा

UNHRC Report On Kashmir: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निकाय ने कश्मीर पर भारत, पाकिस्तान की आलोचना की भारत का कहना है कि रिपोर्ट 'गलत और प्रेरित कथा' के अलावा कुछ नहीं
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Siddharth Priyadarshi

•

Updated: 9 Jul 2019, 6:14 PM IST

Jammu-Kashmir

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर राज्य में मानवाधिकारों की स्थिति पर यूएन की एक रिपोर्ट को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सोमवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलवामा हमले के बाद विवादित कश्मीर में तनाव इस क्षेत्र में मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।

आपको बता दें, 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में पाकिस्तान के आतंकवादी समूह जैश द्वारा सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे।

कश्मीर पर यूएन रिपोर्ट

UN मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सैनिकों द्वारा तलाशी अभियान के दौरान मनमाने तरीके से प्रतिबंध लगाने से मानव-अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 'सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच लड़ाई के दौरान मारे गए नागरिकों की बड़ी संख्या के बावजूद कश्मीर में अत्यधिक बल का प्रयोग किया जा रहा है और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।'

JK: बुरहान वानी की बरसी पर घाटी में अलर्ट, अलगाववादियों ने किया कश्मीर बंद का आह्वान

सेना पर सवाल

रिपोर्ट में कश्मीर में भारत द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष कानूनी अधिकारों की भी आलोचना की गई। इसमें कहा गया था कि सैनिकों द्वारा किए गए उल्लंघन के लिए जवाबदेही लगभग न के बराबर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू और कश्मीर में आपातकालीन कानूनों के लागू होने के लगभग तीन दशकों में नागरिक अदालत में केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बलों कर्मियों पर एक भी मुकदमा नहीं चलाया गया है।

संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फरवरी के हमलों के बाद शेष भारत में कश्मीरियों के खिलाफ घृणा का माहौल बन गया है। यूएन ने भारत को हिंसा को रोकने के लिए और अधिककार्रवाई करने का आह्वान किया है।

भारत का जवाब

इस रिपोर्ट के जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि रिपोर्ट में इस क्षेत्र की स्थिति पर "गलत और प्रेरित कथा" प्रस्तुत की गई है। रवीश कुमार ने एक बयान में कहा, '' रिपोर्ट के दावे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करते हैं और सीमा पार आतंकवाद के मूल मुद्दे की अनदेखी करते हैं।"

सेना के जवानों को मिलेगा ऐसा ब्रह्मास्त्र, पत्थरबाजों को वाहन में बैठकर ही करेंगे परास्त

भारत ने कहा कि UNOHCHR की रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में जिस स्थिति का विश्लेषण किया गया है, जो पाकिस्तान द्वारा सीमा पार से किए गए आतंकी हमलों से पैदा होता है।

दर्ज कराया विरोध

भारत ने जम्मू-कश्मीर पर मानवाधिकार आयोग के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा जारी इस नई रिपोर्ट पर राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। भारत सरकार ने रिपोर्ट को "प्रेरित कथा के साथ भ्रामक" भी कहा है। भारत ने रिपोर्ट के उस हिस्से पर सबसे अधिक आपत्ति जताई है जिसमें कहा गया है कि "अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत संरक्षित कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान किया जाए।'

विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र पर आतंकवाद को वैधता देने का आरोप लगते हुए कहा कि 'यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और खुले तौर पर राज्य प्रायोजित आतंकवाद में एक कृत्रिम समानता बनाने का प्रयास है।'

असल मुदा पीओके

भारत ने अपने जवाब में कहा है, "जम्मू और कश्मीर का पूरा राज्य भारत का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान ने भारतीय राज्य के एक हिस्से के अवैध और जबरन अपने कब्जे में लिया है। इसमें तथाकथित 'आजाद कश्मीर' और 'गिलगित-बाल्टिस्तान' का क्षेत्र शामिल हैं। हमने बार-बार पाकिस्तान से इन कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने का आह्वान किया है।"

विश्व से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर ..