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अमरीका की चेतावनीः जरूरत पड़ी तो दोबारा हो सकता है सीरिया पर हमला

सुंयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए अमरीका ने कहा कि जरूरत पड़ी तो सीरिया पर दोबारा हो सकता है हमला।
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नई दिल्ली

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Shiwani Singh

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Updated: 15 Apr 2018, 9:36 AM IST

Syria Atttack

नई दिल्ली। सीरिया में हुए रासायनिक हमले के विरोध में शनिवार को अमरीका सहित ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मिसाइल हमला किया। इस मिसाइल हमले के बाद सीरिया एक बार फिर से पूरी दुनिया में खबरों में आ गया है। वहीं, सीरिया के ख़िलाफ़ अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस के मिसाइल हमलों की भर्त्सना करने के लिए रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समर्थन नहीं जुटा पाया।

अन्तरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
सीरिया मिसाइल हमलों को रूसी राजदूत वसीली नेबेंज़िया ने 'गुंडागर्दी' करार दिया है। रूसी राजदूत का ने कहा कि अमरीका सहित ब्रिटेन और फ्रांस ने सीरिया में मिसाइल हमले करके अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन किया है। रूसी राजदूत ने कहा, 'यह सब एक सोची समझी साजिश के तहत हो रहा है। इस मामले में उकसाया गया है, झूठे आरोप लगाए गए हैं, फैसला सुनाकर सज़ा दी गई है। क्या आप चाहते हैं कि अन्तरराष्ट्रीय मामलों को अब इस तरह से निपटाया जाए। ये अन्तरराष्ट्रीय मामलों में गुंडागर्दी है, यह जानते हुए कि हम दो परमाणु ताक़तों के बारे में बात कर रहे हैं।'

जरूरत पड़ी तो दोबारा होगा हमला
वहीं, संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निक्की हैली ने जवाब देते हुए कहा कि सीरिया में जरूरत पड़ने पर अमरीका दोबारा हमला करने के लिए तैयार है। सीरिया में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के लिए यह सब करना जरूरी था। उन्होंने कहा, 'कल जो सीरिया में सैन्य कार्रवाई की गई उससे हमारा संदेश एकदम साफ़ है कि अमरीका असद सरकार को रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने नहीं देगा।'

हैली ने कहा कि शनिवार को हुए हमले में हमने उस शोध केंद्र को पूरी तरह से खत्म कर दिया जिसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हत्या के लिए हथियार असेंबल करने में किया जाता था। हैली ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि सीरियाई शासन ने यदि फिर इस ज़हरीली गैस का इस्तेमाल किया तो अमरीका इसका जबाव देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

सीरिया ने अमरीका से बताया झूठा
वहीं, सुरक्षा परिषद की इस आपात बैठक में सीरिया के राजदूत बशर जाफ़री ने अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस को झूठा बताते हुए कई सवाल किए। उन्होंने पूछा, 'क्या सीरिया पर हमला करने के लिए आपकी सरकारों ने इस संगठन से, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जनादेश हासिल किया था। अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन दावा कर रहे हैं कि उन्होंने सीरिया में बम वहां गिराए हैं जहां रासायनिक हथियार बनाए जाते थे। अगर इन तीनों देशों की सरकारों को सही ठिकानों या इन ठिकानों के बारे में इतना सब पता था तो उन्होंने यह जानकारी ओपीसीडब्ल्यू (ऑगनाइज़ेशन फ़ॉर प्रोहिबिशन ऑफ़ केमिकल वेपंस) को क्यों नहीं दी। उन्होंने इन हमलों से पहले यह जानकारी दमिश्क में फैक्ट-फाइंडिंग मिशन के साथ साझा क्यों नहीं की।'