ट्रंप-मोदी के रिश्तों में खटास! अमरीका ने रूसी S-400 मिसाइल खरीदने के खिलाफ भारत को दी चेतावनी

  • भारत रूस से अत्याधुनित तकनीक से लेस S-400 रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीद रहा है।
  • अक्टूबर 2020 से डिलिवरी शुरू कर देगा रूस।
  • 2024 में डिलिवरी की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।

वाशिंगटन। भारत में नई सरकार का गठन हो गया है और मोदी सरकार के तमाम मंत्रियों ने शपथ भी ले ली है। लेकिन लगता है इस बार मोदी सरकार के लिए राह आसान नहीं है। मोदी सरकार में खास कर विदेश नीति के लिए दिक्कतें हो सकती है। दरअसल, रक्षा क्षेत्र में खुद को ताकतवर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही मोदी सरकार को अमरीका ने धमकी दे दी है। रूस से लंबी दूरी की एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के भारत के फैसले को लेकर अमरीका खफा है। अमरीका का कहना है कि यदि भारत ने रूस से s-400 मिसाइल खरीदा तो दोनों देशों के रक्षा संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

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S-400 की खरीद पर अमरीका का अड़ंगा

अमरीकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मॉस्को से S-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने का नई दिल्ली का फैसला बहुत अहम था, हालांकि अमरीका इस बात से इनकार करता है कि यह एक बड़ी बात नहीं है। अमरीका इस दृष्टिकोण से असहमत है कि भारत की ओर से रूस से एस-400 मिसाइल खरीदने का असर तबतक नहीं हो सकता है जब तक वह (भारत) अमरीका से अपनी सैन्य खरीद को बढ़ाता रहता है। अधिकारी ने कहा 'मैं असहमत हूं। एस-400 CAATSA प्रतिबंधों के कारण महत्वपूर्ण है। भविष्य में उच्च तकनीक सहयोग के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है'। ‘CAATSA कानून’ के तहत दुश्मनों से समझौता करने वालों पर अमरीकी प्रतिबंध लागू होते हैं। ट्रम्प प्रशासन पहले ही साफ कर चुका है कि इस कानून के बावजूद समझौता करने वाले देश रूस को गलत संदेश पहुंचा रहे हैं। यह चिंता की बात है।’ अमरीका का कहना है कि भारत वर्षों से अपने हथियारों की आपूर्ति में विविधता ला रहा है। अमरीका को अनुमान है कि भारत के पास शायद 60 से 70 फीसदी हथियार सोवियत या रूस के बने हुए हैं। अब मोदी सरकार के नए विदेश मंत्री एस जयशंकर के लिए कांटों भरा यह सबसे बड़ा दायित्व है कि अमरीका व रूस के बीच सामंजस बनाकर S-400 मिसाइल डील को आगे बढ़ाए।

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अत्याधुनिक तकनीकी क्षमता से लेस है S-400

S-400 मिसाइल को रूस की सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली के रूप में जाना जाता है। चीन ऐसा पहला देश है जिसने 2014 में रूस के साथ सरकार-टू-सरकार समझौता करते हुए इसे खरीदा है। इसके बाद भारत ने भी रक्षा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए बीते साल इसे खरीदने के लिए करार किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच व्यापक वार्ता के बाद अक्टूबर में 5 बिलियन डॉलर की S-400 वायु रक्षा प्रणाली सौदे पर हस्ताक्षर किए। संभावना है कि रूस मिसाइलों की डिलीवरी अक्टूबर 2020 से शुरू कर देगा, जो कि अप्रैल 2023 में पूरा हो जाएगा।

 

 

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Anil Kumar
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