
संयुक्त राष्ट्र। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के भारत सरकार के फैसले को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ( UNSC ) की अनौपचारिक बैठक में चीन और पाकिस्तान को करारा झटका लगा है।
रूस ने भारत के पक्ष में अपना फैसला देते हुए चीन और पाकिस्तान को झटका दिया। इससे बौखलाए चीन ने कहा कि कश्मीर में हालात तनावपूर्ण और खतरनाक है।
चर्चा के दौरान रूस ने अपना पक्ष रखते हुए साफ कर दिया कि कश्मीर का मसला द्विपक्षीय मामला है। इसका हल भारत-पाकिस्तान को मिलकर निकालना चाहिए।
रूस ने भारत का साथ देते हुए कहा कि कश्मीर मामले पर केवल द्विपक्षीय बातचीत होनी चाहिए। बता दें कि चीन के आग्रह पर UNSC में कश्मीर को लेकर चर्चा की गई।
बता दें कि UNSC में बैठक शुरू होने से पहले इमरान खान ने अमरीकी राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत की। दोनों के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई।
चीन ने जताई चिंता
बैठक के दौरान चीन ने अपने हमदर्द दोस्त पाकिस्तान का साथ दिया और कश्मीर को लेकर चिंता जाहिर की। चीन ने कहा कि कश्मीर में किसी भी तरह से एकतरफा फैसला नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसी एकतरफा कार्रवाई वैध नहीं है।
चीन ने आगे यह भी कहा कि कश्मीर में मौजूदा हालात को लेकर चीन ने कहा कि अभी कश्मीर में तनावपूर्ण और खतरनाक माहौल है।
UNSC की बैठक खत्म होने के बाद चीनी राजदूत ने कहा कि भारत ने अपने संविधान में जो संवैधानिक संशोधन किया है उससे मौजूदा स्थिति बदल गई है।
ऐसा माना जा रहा है कि चीन ने पाकिस्तान को खुश करने के लिए अनुच्छेद-370 के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाया है।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के मुद्दे पर बंद कमरे में सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच हुई चर्चा से पाकिस्तान को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है।
UN में कश्मीर मुद्दे पर दूसरी बार चर्चा
आपको बता दें कि चीन के आग्रह पर संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मसले को लेकर चर्चा हो रही है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है, जब बंद कमरे में किसी मामले पर चर्चा की जा रही है।
वहीं यह दूसरा ऐसा अवसर है, जब कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा हो रही है। इससे पहले 1971 में कश्मीर विवाद को लेकर बैठक हुई थी।
ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्य हैं, जिसमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य देश हैं। स्थायी सदस्यों में अमरीका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल है, जबकि अस्थायी सदस्यों में इंडोनेशिया, जर्मनी, डोमिनिक रिपब्लिक, बेल्जियम, दक्षिण अफ्रीका, कुवैत, पेरू, कोट डीवोएर, पोलैंड और इक्वेटोरियल गुएनी शामिल है।
स्थायी सदस्यी सदस्यों का कोई कार्यकाल नहीं होता है, जबकि स्थायी सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है। हर दूसरे साल में अस्थायी सदस्य देशों में परिवर्तन होते रहता है।
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Updated on:
17 Aug 2019 12:47 pm
Published on:
16 Aug 2019 08:07 pm

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