
बैंक में गिर गए वृद्ध किसान के दस हजार रुपये, वापस पहुंचा बैंक तो गार्ड की बात सुन निकल गए आंसू
अमरोहा। आज के समय से किसी से ईमानदारी की कल्पना करना बेमानी साबित होगी। चारों तरफ लूट-खसोट का आलम ये है कि इंसान अब किसी पर भरोसा भी नहीं कर पाता। लेकिन अमरोहा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मिसाल पेश की है कि आज भी ईमानदारी जिंदा है और अमरोहा की ये घटना इस बात की तस्दीक करती है। भले ही वो पैसों से अमीर नहीं हो लेकिन दिल का अमीर था जिसकी ईमानदारी ने सभी का दिल जीत लिया।
दरअसल अमरोहा के हसनपुर के सिंडिकेट बैंक में गुरुवार को 1तहसील क्षेत्र के गांव झुरैरी निवासी एक वृद्ध किसान उदल सिंह बैंक से पैसे निरालने गए थे। तभी उनका पैसा गिर गया और उन्हें पता भी नहीं चला और घर वापस आ गए। लेकिन बैंक में खड़े सुरक्षा गार्ड बुद्धप्रकाश ने दस हजार गिरे हुए देख लिए और उसने उठा लिए। गार्ड को रुपये लेते हुए किसी ने नहीं देखा। लेकिन एक ईमानदार के लिए ये गवारा नहीं की वो किसी और के पैसों को इस तरह से रख ले। गार्ड बुद्धप्रकाश तुंरत नोटो की गड्डी लेकर शाखा प्रबंधक के पास पहुंचा और नगदी देकर कहा कि सर किसी के रुपये गिर गए हैं। शाखा प्रबंधक पंकज मणि ने जैसे ही ये उसके मुंह से ये शब्द सुना की ये किसी के गिरे हुए पैसे हैं। वह आश्चर्य से उसे देखने लगे और गार्ड की पीठ थपथपाई और पैसा कैशियर को दे दिया जिससे अगर बुजुर्ग वापस आए तो उसे पैसे लौटा दिए जाएं।
इसी बीच घर पहुंचे वृद्ध को जब इस बात इल्म हुआ थो उनके होश उड़ गए। वृद्ध किसान उदल सिंह उल्टे पांव बैंक भाग कर गए और अंदर जा कर इधर-उधर खोजने लगे। तभी वहां लगे सुरक्षा गार्ड की नजर उन पर पड़ी तो उसने उन्हें राहत की सांस लेने को कहा और बताया की उनके पैसा सुरक्षीत है। इसके बाद वे बैंक मैनेजर के पास पहुंचे जहां उन्होंने सीसीटीवी चेक किया तो दस हजार रुपये बुजुर्ग के ही निकले और उन्हें उनके रुपये सौंप दिए गए। इसके साथ ही मैनेजर ने जब गार्ड की ईमानदारी की बात बताई तो बुजुर्ग आंखों से खुशी के आंसू आ गए और गार्ड को इनाम के रुप में पांच सौ रुपये पकड़ाने लगे। लेकिन गार्ड ने उसे अपना कर्तव्य बताते हुए लेने से इनकार कर दिया।
Published on:
22 Jun 2018 01:37 pm
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