
बाढ़ का कहर : रामगंगा खतरे के निशान से नीचे, लेकिन तबाही के निशान देख सहमे ग्रामीण
मुरादाबाद: बीते 48 घंटों से अधिक समय से बारिश थमने से जनपद की नदियों का रुख थोडा नरम हुआ है सबसे ज्यादा क्षेत्र में बहने वाली रामगंगा नदी का पानी खतरे के निशान से अभी 30 सेंटीमीटर नीचे आ गया है। जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है। क्यूंकि पानी शहर के तटीय इलाकों में घुसा होने के चलते उसके सामने लगातार चुनौतियां बढ़ रहीं थी। शुक्रवार सुबह को काफी बारिश हुई लेकिन नदी के पानी पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा। डीएम राकेश कुमार सिंह के मुताबिक अभी रामगंगा में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। लोग घबराएं नहीं धीरे धीरे पानी उतर रहा है।
24 घंटे में बढ़ गया था पानी
पिछले दिनों एकाएक रामगंगा का पानी तेजी बढ़ा और महज 24 घंटे में खतरे के निशान को पार कर गया। नदी से सटे इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया था। सबसे ज्यादा प्रभावित ठाकुरद्वारा और कांठ तहसील के बाद सदर तहसील में शामिल मूंडापाण्डेय में बड़ी संख्या में गांवों में घरों के साथ फसलों का नुकसान हुआ है। ग्रामीणों की पूरी की पूरी धान और गन्ने की फसल बर्बाद हो चुकी है। दर्जनों ग्रामीणों के घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। गांव पहुंचनें के सम्पर्क मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। यही नहीं खतरे को अभी देखते हुए प्रशासन ने ठाकुरद्वारा भोजपुर मार्ग पर बने पुल पर यातायात रोक दिया है। यहां बाढ़ से सड़क बुरी तरह कट गयी और ढेला नदी का कटान अभी भी जारी है।
न घर बचा ने खेत
उधर ग्रामीण अब अपने उजड़े हुए घर खेत देखकर बेहद परेशान हैं। क्यूंकि मदद के रूप में अभी उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। जिनके घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं उन्हें सरकारी स्कूल में जगह दी गयी है। मिड डे मील के जरिये उन परिवारों को खाना दिया जा रहा है। यही नहीं बाढ़ के बाद गांवो में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
नुकसान का जुटाया जा रहा आंकड़ा
एडीएम फायनेंस प्रीति जायसवाल ने सभी तहसीलदारों व लेखपालों को नुकसान की रिपोर्ट तैयार जल्द करने के निर्देश दिए हैं ताकि प्रभावितों की मदद की जा सके। लेकिन इसके बाद ही मौसम विभाग ने फिर वेस्ट यूपी और उत्तराखंड में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। जिससे अभी बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित होने की बात नहीं की जा सकती।

Published on:
01 Sept 2018 10:08 am
