
पत्रिका अभियान: ग्रामीण बोले न नेताओं न अधिकारीयों ने ली कभी गांव की सुध,हर बार किया गया वादा
मुरादाबाद: केंद्र या प्रदेश सरकारें विकास के कितने ही दावें कर लें,लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। कुछ यही कहानी शहर की सीमा से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित गांव सैदपुर खद्दर का है। यहां आजादी के 70 सालों बाद भी बिजली भी नहीं पहुंच सकी। हालात ये हैं कि गांव के बच्चे डिबिया की रोशनी में पढाई कर रहे हैं। इस खबर को टीम पत्रिका ने जब बिजली अधिकारीयों के सामने उठाया तो उन्होंने हर हाल में दिवाली से पहले गांव में बिजली पहुंचाने की बात कही। लेकिन आज भी वहां अभी काम शुरू नहीं हुआ है।
किसी ने नहीं ली सुध
टीम पत्रिका ने आज फिर गांव पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की कि आखिर क्यों उनके गांव से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में बिजली की मांग को लेकर हम लोग कई बार आन्दोलन तक कर चुके हैं। लेकिन आज तक कोई पहल नहीं हुई। यही नहीं सभी राजनीतिक नुमाइंदों के यहां भी हम लोगों ने गुहार लगवाई। वहां से भी अभी कुछ नहीं हुआ।
बिजली का सामान हुआ कबाड़
गांव के बुजुर्ग ऋषिपाल सिंह कहते हैं जब कई साल पहले आन्दोलन हुआ तो गांव में ट्रांसफार्मर और बिजली के तार तो खिंच गए,लेकिन उसमें करंट आज तक नहीं दौड़ा। बबिता सिंह बोलीं की गांव में बिजली न होने से बच्चों को पढाई में काफी दिक्कत होती है। घर में रखा फ्रिज और दूसरा बिजली से चलने वाला घरेलू सामान कबाड़ बन चुका है।
पत्रिका को धन्यवाद
दिव्यांशु चौधरी ने पत्रिका की इस मुहीम को धन्यवाद करते हुए कहा कि गांव की अभी तक किसी ने सुध नहीं ली। आपकी खबर के बाद गांव में दिवाली से पहले बिजली पहुंचाने का वादा अधिकारीयों ने किया था। लेकिन अभी लग नहीं रहा। जबकि दो तीन दिन बाद दिवाली है।
तेज होगा आन्दोलन
विजय पाल सिंह और विपिन भी बिजली अधिकारीयों की लापरवाही की कहानी बताते हैं। कहते हैं कई बार इसको लेकर बात हुई,कुछ लोगों से पैसे भी लिए गए। लेकिन अभी तक हम लोग बिजली गांव में नहीं देख सके। वहीँ जसपाल सिंह ने कहा कि अगर जल्द अब गांव में बिजली नहीं आई तो आन्दोलन तेज होगा।
Published on:
03 Nov 2018 02:51 pm
बड़ी खबरें
View Allमुरादाबाद
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
