
मुरादाबाद. कड़ाके की सर्दी और शीतलहर के चलते पूरे प्रदेश में आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। पिछले कुछ दिनों से पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। कड़ाके की सर्दी और कोहरे के चलते जहां लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं, वहीं सर्दी से ठिठुरते गरीब और बेघर लोग खुले आसमां के नीचे सर्दी से संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।
मुरादाबाद में भले ही प्रशासन का दावा गरीब और बेघर लोगों को सर्दी से हरसम्भव राहत देने का है, लेकिन सरकारी दावों की तरह यह दावा भी हमारी पड़ताल में हवा-हवाई ही साबित हुआ है। जनपद के सात रैन बसेरों में जो इंतजाम प्रशासन द्वारा किए गए हैं वे लोगों के रहने लायक कतई नजर नहीं आए। सर्द रात में सड़कों पर ठिठुरते लोगों के लिए प्रशासन द्वारा अभी तक अलाव का इंतजाम भी नहीं किया गया है और न ही रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर कोई रैन बसेरा बनाया गया है। देर रात जब पत्रिका डॉट कॉम की टीम रैन बसेरों का रियल्टी चेक करने पहुंचे तो हालात बद से बदतर नजर आए। लोगों को जो बिस्तर रैन बसेरों में दिया गया था वह महीनों से नहीं धुला था और बिस्तर के नीचे बिछाई जाने वाली पुआल भी नजर नहीं आई। इतना ही नहीं रैन बसेरों में लोगों को मच्छरों से बचाने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं थी।
बता दें कि दशसराय क्षेत्र में प्रशासन द्वारा महिलाओं के लिए भी एक रैन बसेरे का निर्माण किया गया है। जहां बदतर हालत को देखकर कोई भी महिला जाने को तैयार नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है और न ही यहां ठहरने वाली महिलाओं के लिए खाने पीने का कोई इंतजाम किया गया था। सीलन के साथ बदबूदार बिस्तर को महीनों से नहीं धोया गया था। रैन बसेरे में केयर टेकर खुद अव्यवस्थाओं का रोना रोते नजर आए।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कड़ाके की सर्दी में आम लोगों को राहत देने के दावे करने वाले प्रशासन की कब आंख खुलेगी और उसे लोगों की परेशानी का अहसास कब होगा?
Published on:
11 Jan 2018 12:22 pm
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