
पुलिस का नाम आते ही ज्यादातर लोग खौफजदा हो जाते हैं। वहीं कई लोग तो उन्हें संवेदना से परे क्रूर कहने से भी नहीं चूकते। लेकिन इससे इतर भी कई बार मानवता की मिसाल बने पुलिसकर्मियों की खबरें भी पुलिस के प्रति हमारी सोच को बदल कर रख देते हैं। मानवीय संवेदना की कहानी कहता एक ऐसा ही मामला आज फिर सामने आया है। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में पुलिस की संवेदनशीलता की ये रियल लाइफ कहानी आपको भी जरूर मोटिवेट करेगी...
जानें पूरा मामला इन दिनों त्योहारों, उत्सवों और मेलों का दौर चल रहा है। मुरैना में भी 25 दिसंबर की दरमियानी रात को जीवाजी गंज पार्क में खाटू श्याम का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यहां महिला आरक्षक की ड्यूटी लगाई गई थी। वह अपनी ड्यूटी खत्म कर रात 2 बजे घर लौट रही थी तभी, रास्ते में उसे किसी महिला के कराहने की आवाज आई। दर्द से तड़पती रही प्रसूता दर्द से तड़पती इसी आवाज को सुनकर महिला आरक्षक पीडि़ता के पास गई। महिला के साथ एक और महिला थी। महिला आरक्षक ने महिला से पूछा पूछा कि आपको क्या परेशानी है? दर्द से तड़पती महिला ने बताया कि वह गर्भवती है और उसे पेट में दर्द हो रहा है। आरक्षक महिला को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां उसे भर्ती कर लिया गया। जा सकती थी दोनों की जान जिला अस्पताल में गर्भवती की जांच के बाद डॉक्टर ने महिला आरक्षक को बताया कि अगर 10 मिनट की देरी होती, तो महिला और शिशु दोनों की जान जा सकती थी। यह सुनकर वाकई महसूस हुआ न कि यदि महिला आरक्षक किसी का इंतजार करतीं या अन्य तफ्तीश में लग जातीं तो दोनों की जान जा सकती थी। लेकिन पुलिस की तत्परता से महिला और बच्चा दोनों ही सुरक्षित बच गए। प्रसव पीडि़ता महिला का नाम प्रीति धानुक पत्नी संतोष धानुक उम्र 40 साल निवासी तुस्सीपुरा मुरैना बताया जा रहा है।
Published on:
27 Dec 2023 09:52 am
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