
मुंबई पुणे के बीच इस वजह से निर्दयीता से काटे जाएंगे 5500 पेड़
मुंबई. महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम ने मुंबई पुणे के बीच कठिन और असुविधाजनक चढ़ाई से बचने के लिए एक मिसिंग लिंक परियोजना शुरू की है। इस मिसिंग लिंक के काम के दौरान केवल 5500 पेड़ों को काटा जाएगा। वहीं पेड़ों के नुकसान को लेकर एमएसआरडीसी ने 48 हजार पेड़ लगाने का फैसला किया है। ये वैकल्पिक पौधे औरंगाबाद में लगाए जाएंगे। साथ ही निगम की योजना मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के पास भी कुछ पेड़ लगाने की है। मिसिंग लिंक के काम के दौरान यह मिसिंग लिंक केबल स्टेड ब्रिज से दो सुरंगों के माध्यम से जोड़ा होगा, लेकिन इस सारे काम में 83 हेक्टेयर पर 5500 पेड़ काटे जाने हैं। कुछ दिनों पहले ही मुंबई उच्च न्यायालय ने भी इस मामले पर अपनी राय दी थी। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि विकास के लिए पर्यावरण से समझौता करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
विभाग के नाम पर दी जाए जमीन...
उल्लेखनीय है कि अदालत ने तर्क भी दिया कि दोनों मुद्दे महत्वपूर्ण थे। कुछ दिनों पहले एमएसआरडीसी को केंद्रीय पर्यावरण विभाग से अनुमति मिली। एमएसआरडीसी केंद्रीय विभाग की अनुमति से अगले पांच वर्षों के लिए इन पेड़ों के रख-रखाव के लिए जिम्मेदार होगा। केंद्रीय पर्यावरण विभाग ने यह भी आदेश दिया है कि भूमि का मुआवजा देते समय वन विभाग के नाम पर जमीन दी जानी चाहिए।
वन्य जीवों के लिए MSRDC ने उठाए विशेष कदम...
हर दिन 1 लाख 80 हजार वाहन का आवागमन होगा...
मार्च से खोपोली से कुसगांव तक मिसिंग लिंक का काम शुरू किया गया है। इस काम के दौरान देश के सबसे बड़ी सुरंग 21 मीटर व्यास का निर्माण किया जाएगा। इस पूरे मिसिंग लिंक का काम तीन साल तक चलने वाला है। आमतौर पर इस मिसिंग लिंक के काम के कारण यह अनुमान लगाया जाता है कि अगले 20 वर्षों में 1 लाख 80 हजार वाहन हर दिन इस मार्ग का उपयोग करेंगे।
Updated on:
14 Nov 2019 09:07 pm
Published on:
14 Nov 2019 09:06 pm
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