
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके (Photo: IANS)
Abhijeet Dipke: नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर हुए आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज के बाद आंदोलन कमजोर होने के बजाय और मजबूत हो गया। उनका आरोप है कि यदि उन्हें उस दिन आंदोलन में जुटी भीड़ का वास्तविक अंदाजा हो जाता तो उसी दिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जा सकता था। हम पड़ोसी देशों जैसी स्थिति बना सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बदली जानी चाहिए, हम 2029 में अपना राजनीतिक रुख तय करेंगे।
अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार को लगा था कि लाठीचार्ज के बाद छात्र डरकर घर लौट जाएंगे और आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन हुआ इसका उल्टा। उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन को देशभर में और अधिक समर्थन मिलने लगा तथा कई विपक्षी दल भी इसके समर्थन में सामने आए।
उन्होंने कहा, "20 जुलाई को हमने साबित कर दिया कि इस देश में नेपाल और बांग्लादेश जैसी स्थिति नहीं बनने देंगे। भीड़ बहुत बड़ी थी। अगर हम चाहते तो बहुत कुछ कर सकते थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया क्योंकि हमारा संविधान और लोकतंत्र पर विश्वास है।"
दीपके ने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने कहा, "हमारा देश बाबा साहेब आंबेडकर और महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने वाला देश है। हमें संविधान से प्रेम है। अगर हम चाहते तो हालात अलग हो सकते थे, लेकिन हमने संयम रखा।"
टीवी9 मराठी को दिए एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं और सरकार की कार्रवाई पर कई गंभीर आरोप लगाए।
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर के आसपास जैमर लगाए गए थे, जिससे आंदोलनकारियों और मीडिया के बीच संपर्क प्रभावित हुआ।
उन्होंने दावा किया कि मीडिया की लाइव फीड भी प्रभावित हो रही थी और आंदोलन में कितनी भीड़ जुटी है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिल पा रही थी।
दीपके ने कहा, "अगर मुझे उस समय भीड़ का सही अंदाजा हो जाता तो उसी दिन धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लेते।"
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज का उद्देश्य छात्रों में डर पैदा करना था ताकि भविष्य में कोई सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत न करे। उन्होंने कहा कि यह संदेश देने की कोशिश की गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आंदोलन करने वालों के साथ सख्ती की जाएगी।
बता दें कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद तक मार्च निकाला गया था। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं, पुलिस पर भी कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। इस दौरान 80 से जज्यादा लोग घायल हो गए।
Updated on:
02 Aug 2026 12:05 pm
Published on:
02 Aug 2026 12:05 pm
