28 मार्च 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इच्छामृत्यु के लिए 75 आवेदक, हरीश राणा केस के बाद बढ़ा रुझान… BMC के सामने आई नई चुनौती

Mumbai News: गाजियाबाद के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। उनके केस से प्रेरित होकर 75 लोगों ने BMC में इच्छामृत्यु के लिए आवेदन दिया है, जिससे प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

2 min read
Google source verification

मुंबई

image

Imran Ansari

Mar 28, 2026

After the Harish Rana case BMC received 75 euthanasia applicants

हरीश राणा और BMC का फोटो

Mumbai News: गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की इजाजत दी, और कोर्ट के आदेश के अनुसार ही दिल्ली के एम्स में यूथेनेशिया की अंतिम प्रक्रिया हुई। पूरे देश में हरीश राणा की इच्छामृत्यु की चर्चा थी। अब हरीश के केस से प्रेरित होकर बृहन्मुंबई नगर निगम को 75 लोगों के द्वारा अपनी इच्छामृत्यु के लिए आवेदन दिया गया है। एक साथ इतने आवेदन आने के बाद से अब बीएमसी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

आपको बता दें कि जो लोगों के द्वारा बीएमसी को आवेदन दिए गए हैं उनमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि भविष्य में यदि वे किसी भी प्रकार की घटना या बीमारी से कोमा जैसी स्थिति में चले जाते हैं और उनके ठीक होने की गुंजाइश नहीं होती है तो उन्हें हरीश राणा के जैसे ही इच्छामृत्यु का विकल्प दिया जाए। इसके लिए आवेदकों ने बकायदा ‘लिविंग विल’ भी बनवाकर उसे नोटरी से प्रमाणित कराया है और संबंधित अधिकारियों के पास जमा कर दिया है।

मुंबई की मेयर का जवाब

एक साथ इच्छामृत्यु के लिए आए आवेदकों के मामले को लेकर मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने बताया है कि बीएमसी की भूमिका केवल इच्छामृत्यु से जुड़े आवेदनों को सुरक्षित रखने तक सीमित है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मरीज इस संबंध में आवेदन देता है, नगर का काम केवल उसे संभाल कर रखना होता है, लेकिन उसे लागू करने के अधिकार नहीं होता है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस तरह के निर्णय का अधिकार परिवार और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही तय होता है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निष्क्रिय इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दिए जाने के बाद बीएमसी ने प्रत्येक वार्ड में मेडिकल अधिकारियों को ‘लिविंग विल’ से जुड़े दस्तावेजों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। इच्छुक व्यक्ति को नोटरीकृत प्रारूप में ‘लिविंग विल’ तैयार कर अपने संबंधित वार्ड कार्यालय में जमा करना होता है, जहां इसे आधिकारिक रिकॉर्ड के रूप में रखा जाता है।

प्रक्रिया आसान बनाने के लिए बनेगा एप

बीएमसी (BMC) के पास अब तक कुल 75 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इस पूरी प्रक्रिया को अधिक सुगम और सरल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है, जिससे भविष्य में इच्छुक लोग घर बैठे आवेदन कर सकेंगे। आवेदनों की यह लहर हरीश राणा के निधन के बाद देखी जा रही है, जो भारत में कानूनी तौर पर 'इच्छामृत्यु' (Euthanasia) की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति बने। 31 वर्षीय हरीश राणा ने दिल्ली के एम्स (AIIMS) में अंतिम सांस ली, जहां उन्हें लंबे समय से पेलिएटिव केयर (उपशामक देखभाल) दी जा रही थी। उनके इस ऐतिहासिक मामले ने देश में 'लिविंग विल' और गरिमापूर्ण मृत्यु के अधिकार पर एक नई बहस छेड़ दी है।