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बारामती उपचुनाव: सुनेत्रा पवार की नहीं होगी निर्विरोध जीत! कांग्रेस ने बिगाड़ा खेल

Baramati Bypoll Sunetra Pawar: अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के बेहद प्रभावशाली नेता थे। वह बारामती से लगातार आठ बार विधायक चुने गए थे और राज्य के छह बार उपमुख्यमंत्री रह चुके थे।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Apr 03, 2026

Ajit Pawar Sunetra Pawar

अजित पवार और सुनेत्रा पवार (Photo: IANS)

महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती विधानसभा सीट को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर 23 अप्रैल को उपचुनाव होगा। कांग्रेस ने बारामती के साथ-साथ राहुरी सीट पर भी चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है, जिससे मुकाबला अब दिलचस्प हो गया है। बारामती में अजित पवार की पत्नी व उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार एनसीपी की उम्मीदवार होंगी। सुनेत्रा पवार को भाजपा, शिवसेना और एनसीपी शरद गुट का समर्थन हासिल है।

कांग्रेस को हाईकमान की मंजूरी, उम्मीदवार पर नजरें टिकीं

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के बारामती उपचुनाव लड़ने के फैसले को पार्टी हाईकमान ने मंजूरी दे दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस बारामती से किसे मैदान में उतारेगी। इस फैसले से राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।

6 अप्रैल को सुनेत्रा पवार भरेंगी नामांकन

सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से सुनेत्रा पवार बारामती से चुनाव लड़ेंगी। वह 6 अप्रैल को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल करेंगी। महायुति में भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे), एनसीपी (सुनेत्रा पवार) शामिल है।

वर्तमान में सुनेत्रा पवार न तो विधायक और न ही विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं। उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है।

अजित पवार के निधन के बाद 30 जनवरी को सुनेत्रा पवार को एनसीपी विधायक दल का नेता चुना गया और भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके बाद 26 फरवरी को पार्टी ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुना।

कांग्रेस के फैसले से बदला चुनावी समीकरण

बारामती को पवार परिवार का गढ़ माना जाता है, ऐसे में यह सीट हमेशा से राजनीतिक रूप से बेहद अहम रही है। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाविकास आघाड़ी (MVA) के तहत बारामती में शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) ने चुनाव लड़ा था। हालांकि इस बार शरद गुट ने सुनेत्रा पवार को समर्थन देने का फैसला किया है। विपक्षी गठबंधन एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे), एनसीपी (शरद पवार) शामिल है।

हालांकि, उद्धव की शिवसेना (UBT) की ओर से अभी तक स्पष्ट कुछ नहीं कहा गया है। जबकि प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) और राष्ट्रीय समाज पक्ष के कांग्रेस को समर्थन देने के संकेत मिल रहे हैं।

बारामती अजित पवार का गढ़

कांग्रेस का बारामती जैसे मजबूत गढ़ में उम्मीदवार उतारना एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बारामती में सुनेत्रा पवार की स्थिति काफी मजबूत है, लेकिन कांग्रेस के मैदान में उतरने से चुनाव अब औपचारिक नहीं बल्कि वास्तविक मुकाबले में बदल सकता है।

बारामती विधानसभा सीट लंबे समय से अजित पवार का गढ़ रही है। उन्होंने 1991, 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में यह सीट जीती थी।

2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपने भतीजे और एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार युगेंद्र पवार को 1,00,899 वोटों से हराया था। उस चुनाव में अजित पवार को 1,81,132 वोट मिले थे, जबकि युगेंद्र पवार को 80,233 वोट मिले थे।

सियासत के चलते टूटी परंपरा!

महाराष्ट्र की राजनीति में यह परंपरा रही है कि किसी जनप्रतिनिधि के निधन के बाद उपचुनाव में यदि उनके परिवार से ही किसी को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो विपक्षी दल सम्मान स्वरूप अपना प्रत्याशी नहीं उतारते थे। लेकिन हाल के वर्षों में हुए उपचुनावों में यह परंपरा टूटती दिखी।

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