
सुनेत्रा पवार और हर्षवर्धन सपकाल (Photo: IANS)
महाराष्ट्र में बारामती विधानसभा उपचुनाव की राजनीतिक बिसात पर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस ने आखिरकार इस चुनावी दंगल से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आज दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उम्मीदवारी वापस लेने के निर्णय की घोषणा की। पार्टी ने इस सीट से अधिवक्ता आकाश मोरे को चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन अब उनके नाम वापस लेने से महायुति और एनसीपी (अजित पवार गुट) की उम्मीदवार सुनेत्रा पवार की जीत तय मानी जा रही है।
गांधी भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में हर्षवर्धन सपकाल ने बताया कि यह निर्णय वरिष्ठ नेताओं के अनुरोध के बाद लिया गया है। उन्होंने खुलासा किया कि आज सुबह ही एनसीपी शरद गुट के विधायक रोहित पवार ने उनसे मुलाकात कर उम्मीदवारी वापस लेने की विनंती की थी। इसके अलावा, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से चुनाव नहीं लड़ने की अपील की थी।
बता दें कि विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में शामिल एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) ने दिवंगत नेता अजित दादा के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में बारामती उपचुनाव में अपने उम्मीदवार न उतारने की घोषणा पहले ही कर दी थी।
उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा के साथ ही हर्षवर्धन सपकाल ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने अजित पवार गुट के भाजपा के साथ जाने को सत्ता की लाचारी करार दिया। उन्होंने कहा, एनसीपी अजित गुट का भाजपा जैसी विषैली विचारधारा के साथ जुड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सपकाल ने कहा कि अजित दादा एक कद्दावर नेता थे, लेकिन उनके विमान हादसे को लेकर कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। यह महाराष्ट्र का दुर्भाग्य है। सरकार एफआईआर दर्ज ही नहीं करना चाहती। जरुर कुछ छिपाया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हर्षवर्धन सपकाल ने अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु और उसके बाद की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार कुछ न कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह महाराष्ट्र का दुर्भाग्य है कि इतने बड़े नेता की हादसे में मौत हो गई और कई आरोपों के बावजूद पुलिस मामला तक दर्ज नहीं कर रही है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे चुनावी मैदान से भले ही हट रहे हैं, लेकिन इन मुद्दों पर आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे।
अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर सुनेत्रा पवार का लड़ना एक भावनात्मक और रणनीतिक कदम माना जा रहा है। कांग्रेस के हटने के बाद अब बारामती में मुख्य विपक्ष की अनुपस्थिति ने इसे लगभग एकतरफा मुकाबला बना दिया है। अब सुनेत्रा पवार के सामने किसी बड़े दल का प्रत्याशी नहीं है, हालांकि बड़ी संख्या में निर्दलीय बारामती उपचुनाव जरुर लड़ रहे हैं।
बारामती उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे।
पुणे जिले का बारामती दशकों से पवार परिवार का मजबूत गढ़ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार यहां से लगातार 8 बार जीत चुके थे। अजित पवार ने 1991, 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में बारामती विधानसभा सीट पर भारी अंतर से जीत हासिल की।
2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने भतीजे और एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार युगेंद्र पवार को 1,00,899 वोटों से हराया था। अजित पवार को 1,81,132 वोट मिले थे, जबकि युगेंद्र पवार को 80,233 वोट मिले थे।
Updated on:
9 Apr 2026, 3:24 PM IST
Published on:
9 Apr 2026, 3:02 PM IST
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