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‘पिता को बहुत गुस्सा आता है’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मां को सौंपी बच्चे की कस्टडी, फैसले में कही बड़ी बात

Bombay High Court: महिला ने कहा कि उसने अपने पति के खिलाफ अमेरिका और सिंगापुर में घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Dec 07, 2023

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बच्चे की कस्टडी पिता को देने से किया इनकार

Maharashtra News: पति-पत्नी के बीच विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता पिता को उसकी तीन साल की बेटी की कस्टडी देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा की एक बच्चे को उसके माता-पिता दोनों का साथ पाने का पूरा अधिकार है, लेकिन माता-पिता के बीच संघर्ष की स्थिति में बच्चे को भुगतना नहीं पड़े।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीन साल की बच्ची की कस्टडी उसके पिता को देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पिता पर गुस्सैल व हिंसक होने के आरोप लगे है। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस गौरी गोडसे की पीठ ने अपनी बेटी की कस्टडी की मांग करने वाले अमेरिकी नागरिक द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह भी पढ़े-पत्नी के पास से अपने बच्चे को ले जाना किडनैपिंग नहीं... बॉम्बे हाईकोर्ट ने रद्द की पिता पर दर्ज FIR

सुनवाई के दौरान पीठ ने पत्नी के आरोपों पर गौर किया, जिसमें उसने दावा किया कि याचिकाकर्ता पति को गुस्से की समस्या थी। साथ ही याचिकाकर्ता पर पत्नी के साथ मारपीट के भी आरोप लगे थे। पत्नी ने दावा किया कि याचिकाकर्ता क्रोध प्रबंधन सत्र के लिए भी जाता था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आपसी विवाद के चलते पति-पत्नी अलग रह रहे थे।

वहीं, याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि उसकी पत्नी उसके बच्चे को अवैध रूप से भारत ले आई है। हालांकि पीठ ने अपने आदेश में कहा कि बच्चे की कस्टडी पर फैसला केवल उसके (बच्चे) सर्वोत्तम हित के आधार पर लिया जाएगा। आदेश में कहा गया, "याचिकाकर्ता के गुस्से के पिछले आचरण को ध्यान में रखते हुए, बच्चे की कस्टडी उसे सौंपना सुरक्षित नहीं होगा। इससे बच्चे के स्वस्थ और सुरक्षित पालन-पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।"

कोर्ट ने इस पर भी गौर किया कि बच्चे को विदेशी क्षेत्राधिकार में वापस भेजने का निर्देश देने पर बच्चे को कोई शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक या अन्य नुकसान नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने कहा, "बच्ची साढ़े तीन साल की है, इतनी छोटी उम्र की लड़की को अपनी मां की देखभाल और स्नेह की आवश्यकता होती है।"

कोर्ट ने कहा कि महिला अपने अलग हो चुके पति को बेटी के बारे में न केवल जानकारी देती है, बल्कि पिता और बेटी के बीच वीडियो कॉल पर बात भी करवाती है। सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुए भारत में अपनी मां के साथ रहना बच्ची के सर्वोत्तम हित में है. यह भी नहीं माना जा सकता कि बच्ची को अवैध रूप से विदेश से लाया गया है।

याचिका के अनुसार, कपल ने 2018 में अमेरिका में शादी की थी. दोनों को 2020 में बेटी हुई। बच्चे के जन्म के बाद दोनों में विवाद हुआ और दंपति छह महीने तक अलग रहे। बाद में 2022 में उन्होंने एक सुलह समझौते पर हस्ताक्षर किए और सिंगापुर चले गए। हालांकि, नवंबर 2022 में महिला बच्चे के साथ भारत लौट आई और वापस जाने से इनकार कर दिया।

इसके बाद उस पति ने सिंगापुर की एक अदालत में याचिका दायर की, जिसने बच्चे की संयुक्त कस्टडी का आदेश दिया। फिर इस साल फरवरी में व्यक्ति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर अपनी अलग रह रही पत्नी को सिंगापुर अदालत के आदेश का पालन करने के लिए निर्देश देने और बच्चे की कस्टडी की मांग की।

जबकि महिला ने याचिका का विरोध किया और कहा कि उसे अपनी और अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए भारत लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। साथ महिला ने पति पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। महिला ने कहा कि उसने अमेरिका और सिंगापुर दोनों जगह पर पुलिस में पति के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी।